इस सिस्टम का परीक्षण करने के लिए वर्ष 2018 से इस पर काम किया जा रहा है। इस प्रणाली का परीक्षण करने के लिए लगभग 400 मीटर की लंबाई के हरिद्वार-देहरादून ट्रैक के पश्चिमी हिस्से को चुना गया। यह स्थान आरटीआर के कांसरों वन विश्राम गृह से लगभग 600 मीटर की दूरी पर स्थित है।
इसमें थर्मल इंफ्रारेड इमेजिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस संचालित भूकंपीय संकेतों और थर्मल इमेज से पता चल जाता है कि रेलवे ट्रैक के आसपास कोई हाथी या जानवरों का झुंड गुजर रहा है। दोनों प्रणालियों से सूचना को सर्वर पर ग्राफिकल यूजर इंटरफेस में प्रेषित किया जाता है। ताकि दोनों सेंसिंग तौर-तरीकों से जानवरों की सही स्थित का पता लगाया जा सके। इसके बाद सर्वर से होते हुए यह सूचना रेल ड्राइवर तक पहुंचा दी जाती है।
यूनिट साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट ऑर्गेनाइजेशन, चडीगढ़ (सीएसआईओ) ने इंटेलिजेंस एलिफेंट मूवमेंट डिटेक्शन एंड अलर्ट सिस्टम का प्रदर्शन किया। यह एक उच्च तकनीक पर आधारित प्रणाली है। इसके लागू होने से रेलवे ट्रैक पर वन्य जीवों को खासकर हाथियों की कटकर मौत की घटनाओं में कमी लाई जा सकेगी। रेलवे के अधिकारियों ने सिस्टम को पूरी तरह से समझ लिया है, अब देखने वाली बात होगी कि रेलवे इस सिस्टम को कब तक लागू करता है।
- जेएस सुहाग, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक