निर्वाचन आयोग की ईवीएम मशीन का ‘आखिरी प्रत्याशी’ कहीं अधिक वोट न खा जाए। इससे कांग्रेसी और भाजपाई फिक्रमंद हैं।
देहरादून में 70 हजार वोट ऐसे हैं जो किसी से नहीं जुड़े। इन फ्लोटिंग वोट्स को लेने के लिए दलों में मारामारी है। राजनीतिक दलों से असंतुष्ट ये लोग ईवीएम मशीन के आखिरी बटन ‘नोटा’ (नन आफ दि अबव) को दबा सकते हैं।
जिले में 74094 नए वोटर बने हैं। इनमें युवा भी हैं और महिलाएं भी। इसके अलावा 11 लाख 67 हजार 712 वोटर पुराने हैं।
बहुत से लोग असंतुष्ट
राजनीतिक दल इन वोटरों की अलग-अलग संख्या पर हक जता रहे हैं। इन दलों ने 70 हजार वोटर ऐसे छांटे हैं जिनका किसी दल से ताल्लुक नहीं है। इन्हें फ्लोटिंग वोट्स की श्रेणी में रखा गया है।
इनमें बहुत से लोग हैं जो मौजूदा राजनीतिक दलों की नीतियों से असंतुष्ट हैं। राजनीतिक दलों को आशंका है कि ये वोटर निर्वाचन आयोग के नोटा विकल्प का उपयोग कर सकते हैं, जो चुनाव नतीजों के गड़बड़ाने का सबब बन सकते हैं।
अपनी तरफ लाने का प्रयास
इन्हें अपनी तरफ लाने के लिए भाजपा, कांग्रेस के अलावा आम आदमी पार्टी, यूकेडी और बसपा जद्दोजहद कर रही है। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव त्रिवेंद्र सिंह रावत का दावा है कि मोदी लहर में फ्लोटिंग वोट उनकी तरफ आ जाएगा।
कांग्रेस के प्रदेश महासचिव विजय सारस्वत कहते हैं कि राहुल गांधी के करिश्माई व्यक्तित्व से फ्लोटिंग वोट बैंक कांग्रेस की तरफ आएगा। आप इस वोट पर अपना हक जता रही है।
जिला संयोजक संजय भट्ट कहते हैं कि कांग्रेस और भाजपा से खीजे ये लोग आप के साथ हैं। इस संबंध में बीटेक छात्र संजय कुनाल और रागिनी रस्तोगी से पूछा तो बोले कि देश में बेहतर राजनीतिक विकल्प उभरे इसके लिए नोटा का इस्तेमाल जरूरी है। वही चेहरे, वही वादे हर चुनाव में उबा देते हैं।