धनोल्टी विधानसभा में मनमोहन सिंह मल्ल के नामांकन को लेकर कांग्रेस फंस गई है। पार्टी ने इस सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी प्रीतम पंवार को समर्थन देने का एलान तो कर दिया मगर अब मल्ल मैदान से हटने को तैयार नहीं है। बकौल मल्ल, ‘मैंने पार्टी सिंबल पर नामांकन भरा है और मैं चुनाव मैदान से बिल्कुल नहीं हटूंगा। हालांकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने दोहराया कि आलाकमान के फैसले पर अमल कराया जाएगा, मगर मल्ल के तेवरों से पार्टी की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
शनिवार को कांग्रेस भवन में मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने मल्ल के साथ बैठक की। बताते हैं कि इस बैठक में दोनों दिग्गजों ने मल्ल पर नामांकन वापसी को लेकर दबाव बनाया। मगर मल्ल नाम वापस लेने को तैयार नहीं हैं। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्हें पार्टी अध्यक्ष ने 24 जनवरी को ही सिंबल दे दिया था। नामांकन करने के दिन तक उन्हें पार्टी के निर्णय के बारे में नहीं बताया गया।
अब जबकि वह पार्टी सिंबल से नामांकन दाखिल कर चुके हैं तो अब पीछे हटने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। मल्ल की मानें तो उन्होंने दोनों शीर्ष नेताओं से अनुरोध किया है कि वे पार्टी आलाकमान को फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए कहें।
चुनाव मैदान से न हटने की मल्ल की जिद ने कांग्रेस की दुविधा बढ़ा दी है। तकनीकी तौर पर मल्ल के नामांकन को चुनौती नहीं दी जा सकती। निर्वाचन आयोग के आधिकारिक सूत्रों की मानें तो नामांकन वापसी के अंतिम दिन शाम तीन बजे तक पार्टी यदि प्रत्याशी बदलने या वापस लेने की लिखित सूचना चुनाव अधिकारी को उपलब्ध करा देती तो छंटनी में मल्ल का नामांकन निरस्त हो जाता। मगर निर्वाचन विभाग को पार्टी की ओर से अब तक कोई पत्र नहीं मिला है। ऐसी स्थिति में पार्टी के पास अब सिर्फ एक ही विकल्प है कि मल्ल खुद नामांकन वापस लें।
पार्टी सिंबल पर नामांकन दाखिल कर चुका हूं और चुनाव मैदान से हटने का सवाल ही पैदा नहीं होता।
- मनमोहन सिंह मल्ल
मनमोहन सिंह मल्ल के नामांकन के संबंध में कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। हम भी अखबारों में पढ़ रहे हैं।
-देवेंद्र सिंह नेगी, सहायक निर्वाचन अधिकारी
कोई फैसला होता है, उसे लेकर पुनर्विचार याचिका भी प्रावधान है। इस मामले में कोई न कोई रास्ता निकाल लिया जाएगा। आलाकमान से बातचीत की जा रही है।
- किशोर उपाध्याय, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष