राजाजी राष्ट्रीय पार्क की सीमा पर अपार्टमेंट को अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) देने के मामले में खेल की पर्तें अब सिलसिलेवार खुल रही हैं। मामला नया नहीं, दो साल पुराना है।
अपार्टमेंट बनाने वालों ने तब एनओसी के लिए आवेदन किया था लेकिन तत्कालीन मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक और पार्क निदेशक ने इसे नामंजूर कर दिया था। यहां तक कि शासन स्तर पर एक वरिष्ठ अधिकारी की सिफारिश भी खारिज कर दी गई थी। फिर दो साल में ऐसा क्या हुआ कि एनओसी दे दी गई, यह सवाल बड़ा है।
क्या कहते हैं नियम
भारतीय वन्यजीव अधिनियम 1972 के अनुसार किसी भी नेशनल पार्क की सीमा पर नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड की अनुमति के बिना अपार्टमेंट, रिजार्ट या होटल के लिए एनओसी नहीं दी जा सकती।
वन विभाग के वन्यजीव विंग से जुड़े एक अफसर ने बताया कि उनके कार्यकाल में भी दो अपार्टमेंट के आवेदन आए थे, एक बड़े अफसर ने सिफारिश भी की थी लेकिन नियमानुसार एनओसी नहीं दी गई। पार्क के पास अपार्टमेंट के लिए एनओसी देकर गलत परंपरा शुरू की गई है। इससे भविष्य में पार्क के वन्यजीवों पर संकट बढ़ जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट में चुनौती की तैयारी
वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत एक व्यक्ति अपार्टमेंट को एनओसी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में है। इस संबंध में आरटीआई के तहत एनओसी की प्रति भी मांगी गई है, लेकिन विभाग जानकारी देने में देरी कर रहा है। व्यक्ति का कहना है कि जानबूझकर तीस दिन का समय लगाया जा रहा है।