दून महिला अस्पताल में मानवीय संवेदनाएं सोमवार को तार-तार हो गईं। दर्द से कराहती गर्भवती महिला को यहां तीन घंटे तक इलाज नहीं मिला।
अन्य अस्पतालों में भी नहीं मिला इलाज
इस दौरान नर्सें गप्पों में मशगूल रहीं तो डॉक्टर नदारद। आरोप है कि इससे पहले दो निजी अस्पतालों में भी इस महिला को इलाज नहीं मिला। एमडीडीए कॉलोनी निवासी सुलेखा तीन माह की गर्भवती है।
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सोमवार सुबह अचानक उसे दर्द होने लगा। पति उसे लेकर एक निजी अस्पताल गया, लेकिन वहां डॉक्टर नहीं मिले। इसके बाद उसे एक अन्य निजी नर्सिंग होम ले जाया गया, लेकिन वहां मरीजों की भीड़ होने से इंतजार करने के लिए कहा गया। इस बीच सुलेखा का दर्द बढ़ता देख उसका पति उसे दून महिला अस्पताल ले आया।
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सुलेखा को इमरजेंसी रूम के बाहर बैठाकर वह अंदर गया। इस महिला जहां दर्द से तड़प रही थीं वहीं नर्सें गप्पों में मशगूल थीं। काफी देर तक कई तरह की पूछताछ के बाद नर्सों ने फार्म भरवा लिया लेकिन उसे बाहर इंतजार करने के लिए कहा। उस दौरान वहां डॉक्टर नहीं थी।
'एक डॉक्टर कब तक बैठेगा'
दर्द से कराहती सुलेखा कभी जमीन पर बैठती तो कभी इधर-उधर भटकते पति के पीछे चल देती। सुलेखा के पति ने नर्स से पूछा कि डाक्टर कब आएंगे तो जवाब मिला कि एक डॉक्टर कब तक बैठेगा। करीब तीन घंटे तक सुलेखा दर्द से तड़पती रही इसके बाद उसे उपचार मिल पाया।
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