‘फिक्र को धुएं में उड़ता चला गया’ कुछ इसी अंदाज में आज के युवा से लेकर बुजुर्ग तक नियम और कानून को धुएं में उड़ा रहे हैं। तभी तो एक जनवरी 2016 को केंद्र सरकार की ओर से सिगरेट की खुदरा बिक्री पर लगाई गई रोक के आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
पहले से भी तंबाकू और धूम्रपान को हतोत्साहित करने के लिए तमाम नियम और कायदे बने पर इनका रत्ती भर भी पालन नहीं हो रहा है। केंद्र और राज्य सरकार के स्तर से बार-बार निर्देश मिलने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
लोगों में तंबाकू की लत खत्म करने के लिए जनवरी 2014 में प्रदेश में गुटके की बिक्री पर रोक लगाई गई। लेकिन, सार्वजनिक क्षेत्र में धूम्रपान, खुली सिगरेट की बिक्री, स्कूलों के पास तंबाकू उत्पादों की बिक्री और 21 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति को तंबाकू उत्पादन बेचना प्रतिबंधित होने के बावजूद प्रदेश में धडल्ले से जारी है। अब नए निर्देश जारी होने के करीब एक माह बाद भी सरकार की ओर से इसके क्रियान्वयन के लिए कोई भी प्रयास नहीं किए गए।
चारों ओर धुआं ही धुआं
लोगों को सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करने से रोकने के लिए जुर्माने का प्रावधान है। इसके तहत सभी सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान को पूरी तरह प्रतिबंधित करते हुए 200 रुपये जुर्माने की व्यवस्था की गई। 14 जनवरी 2015 को केंद्र सरकार ने जुर्माना राशि बढ़ाकर एक हजार रुपये करने की सिफारिश की। हालांकि प्रदेश में इस कानून के तहत पिछले तीन वर्षों में 30 मामले भी दर्ज नहीं हो पाए हैं।