सड़क दुर्घटना में घायल या पीड़ित की मदद करने पर अब पुलिस या डॉक्टर मददगार से किसी तरह के सवाल-जवाब नहीं करेंगे।
केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय की अधिसूचना के बाद राज्य सरकार ने भी सभी जिलाधिकारियों और जिला पुलिस कप्तानों को हिदायत दी है कि भविष्य में इस बात का ध्यान रहे। यदि ऐसे मामले में किसी मददगार को परेशान किया गया तो कार्रवाई होगी। इससे मुसीबत में मदद करने वाले व्यक्ति के उत्पीड़न पर अंकुश लगेगा।
परिवहन विभाग के सचिव चंद्र सिंह नपलच्याल ने केंद्रीय अधिसूचना को राज्य में लागू करने संबंधी अधिसूचना शुक्रवार को जारी कर दी।
सभी जिलाधिकारियों, एसएसपी/एसपी और मुख्य चिकित्साधिकारियों को भेजे गए पत्र में कहा गया कि यह देखने में आया है कि सड़क हादसों में जान बचाने के लिए किसी व्यक्ति द्वारा की गई कार्रवाई या मदद के अलावा सूचना पुलिस को देना, एंबुलेंस बुलाना या फिर घायल व्यक्तियों को अस्पताल तक पहुंचाना उनके लिए मुसीबत बन जाता है।
क्योंकि पुलिस और संबंधित अस्पताल मदद करने वाले से अनावश्यक सवाल-जवाब कर उस व्यक्ति का उत्पीड़न करते हैं।
इस संदर्भ में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने दुर्घटना पीड़ितों की जान बचाने के लिए प्रत्यक्षदर्शियों की सुरक्षा के लिए अधिसूचना जारी की थी, ताकि उनसे बेवजह की पूछाताछी कर परेशान न किया जाए। राज्य सरकार ने भी केंद्र के इस फैसले को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है।