पहले चार जिलों का प्रस्ताव
वर्ष 2011 में कोटद्वार, यमुनोत्री, रानीखेत और डीडीहाट जिलों के गठन बनाने का निर्णय हुआ। इसके लिए गढ़वाल और कुमाऊं आयुक्त के माध्यम से तय मानकों के हिसाब स्वरूप तय हुआ। मसलन यमुनोत्री की तब 1,38,559 प्रस्तावित आबादी तय हुई जिसमें तीन तहसील, तीन विकासखंड, दो थाने व 45 पटवारी क्षेत्र थे। कोटद्वार में 324122 आबादी का प्रस्ताव था, जिसमें पांच तहसील, छह ब्लाक, सात थाने व 109 पटवारी क्षेत्र, रानीखेत में 328621 की आबादी का प्रस्ताव था, जिसमें पांच तहसील, छह ब्लाक, चार थाने, व 120 पटवारी क्षेत्र और डीडीहाट में 152227 की आबादी, तीन तहसील, तीन ब्लाक, नौ थाने व 54 पटवारी क्षेत्र प्रस्तावित किए गए।
संख्या आठ हुई, बना एक भी जिला नहीं
वर्ष 2017 में तत्कालीन सरकार में चार और नए जिलों की की कसरत शुरू हो गई। इस सूची में काशीपुर, ऋषिकेश, रुड़की, रामनगर के नाम शामिल हो गए। हालांकि, इनमें राजस्व परिषद की ओर से सिर्फ काशीपुर के प्रस्ताव के संबंध में सूचना दी गई। कुल मिलाकर नए जिलों के प्रस्तावों की संख्या बेशक आठ हो गई, लेकिन सरकार एक भी नहीं बना पाई।
सियासी शिगूफा बनकर रह गया जिलों के गठन का मुद्दा
नए जिलों का मसला लोकसभा और विधानसभा चुनाव में प्रमुखता गरमाया। सूची में ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण तक शामिल हो गया, मगर फिलहाल यह मुद्दा सियासी शिगूफा बनकर रह गया है। सत्ता की कमान संभालने के बाद सीएम धामी ने नए जिलों के गठन की घोषणा कर उम्मीद जगाई थी, लेकिन शासन के स्तर पर कोई हलचल नहीं हो पाई।