उत्तराखंड में नए बीएड कॉलेज न खोलने के सरकार के निर्देश से एनसीटीई में आवेदन करने के बावजूद नए 18 बीएड कॉलेजों के अरमानों पर पानी फिर गया है।
कॉलेजों ने इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के बाद एनसीटीई में आवेदन किया था, लेकिन जब एनओसी के लिए फाइल सरकार के पास पहुंची तो उस पर रोक लगा दी गई। एसोसिएशन ऑफ सेल्फ फाइनेंस इंस्टीट्यूट ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है।
रविवार को हाथीबड़कला स्थित एसोसिएशन कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील अग्रवाल ने बताया कि सरकार ने भारी मांग होने के बावजूद बिना किसी जानकारी के नए बीएड कॉलेजों पर रोक लगा दी है। सरकार ने पहले से संचालित हो रहे बीएड कॉलेजों की शिकायत भी एनसीटीई को की है।
जबकि खुद सरकारी कॉलेजों का हाल बुरा है। न तो सही इंफ्रास्ट्रक्चर है और न ही मानकों के मुताबिक फैकल्टी। अपने कॉलेजों की सुध लेने के बजाए सरकार प्रदेश में उन प्राइवेट कॉलेजों पर लगाम कसना चाहती है, जो सरकार से किसी भी प्रकार की सहायता नहीं लेते हैं।
खास बात यह है कि सरकार की इस रोक का असर प्रदेश में खुलने जा रहे पहले एमपीएड कॉलेज और उन दो बीएड कॉलेजों पर भी पड़ गया है, जिन्होंने अपनी सीटें बढ़वाने के लिए आवेदन किया था।
उन्होंने कहा कि एसोसिएशन से जुड़े सभी कॉलेज इसके खिलाफ लड़ाई शुरू करने जा रहे हैं। इसके लिए कोर्ट भी जाना पड़ा तो वह पीछे नहीं हटेंगे।
बीएड के लिए कुछ नहीं
यूटीयू में बिना प्रवेश परीक्षा के बीएड में सीधे 1500 दाखिलों के मामले पर एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि प्रदेश शासन बीटेक में दाखिले के लिए केवल 12वीं पास को वरीयता दे रहा है।
जबकि बीएड में न्यूनतम 50 प्रतिशत का नियम फॉलो करने के बावजूद शासन कोई कदम उठाने को तैयार नहीं है। नतीजतन बीएड के यूटीयू से जुड़े छात्रों का भविष्य आज भी अधर में लटका हुआ है।
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