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नहीं है बाढ़ की चेतावनी देने वाला कोई सिस्टम

Fri, 09 Aug 2013 08:14 PM IST
देहरादून/ब्यूरो
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प्रदेश में अचानक आने वाली बाढ़ (फ्लेश फ्लड) की पूर्व चेतावनी का कोई तंत्र नहीं है। केंद्रीय जल आयोग बाढ़ पर नजर रखने और मौसम विभाग भारी बरसात की पूर्व चेतावनी जारी करने तक सीमित है। ऐसे में भारी बरसात के बाद आने वाली किसी भी बाढ़ से बचने का तरीका सिर्फ नदियों और गाढ़ गदेरों से दूरी बनाकर रहना ही रह गया है।
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चेतावनी का तंत्र विकसित होना चाहिए
ऐसा नहीं है कि अचानक आने वाली बाढ़ के खतरे को भांपा नहीं गया है। खुद राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण भी कह रहा है कि अचानक आने वाली बाढ़ के लिए पूर्व चेतावनी का तंत्र विकसित होना चाहिए। पर यह अभी तक हो नहीं पाया है।

मुसीबत यह है कि इस तरह की बाढ़ अब हकीकत बन गई है और उत्तराखंड को लगातार पिछले दो सालों से इसका सामना करना पड़ा है। 2012 में उत्तरकाशी में अचानक अस्सी में भारी बरसात के कारण आई बाढ़ ने खासा नुकसान किया था। इस बार भी केदारघाटी में अचानक आई बाढ़ ने कई लोगों को काल का ग्रास बनाया।
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फ्लेश फ्लड की पूर्व चेतावनी का तंत्र अभी तक केवल मौसम विभाग पर टिका हुआ है। मौसम विभाग भी भारी बरसात की चेतावनी देकर रह जा रहा है। वैसे बाढ़ की चेतावनी देने का काम केंद्रीय जल आयोग का है पर केंद्रीय जल आयोग का कहना है कि फ्लेश फ्लड की निगरानी का तंत्र उनके पास नहीं है।

हालांकि अब इसके लिए तैयारी की बात की जा रही है। यह फिलहाल साफ नहीं है कि इस तैयारी में कितना वक्त लगेगा। खुद आपदा प्रबंधन केंद्र के मुताबिक सुनामी के बाद पूर्व चेतावनी तंत्र को विकसित करने में तीस माह का समय लगा था।

आपदा पर इनकी रहती है नजर
मौसम विभाग-आइएमडी - साइक्लोन, बाढ़, सूखा, भूकंप
केंद्रीय जल आयोग -बाढ़
जियोलोजीकल सर्वे -भू स्खलन
डिपार्टमेंट ऑफ ओशियन -सुनामी

क्या है कोशिश
- 4000 उपग्रह आधारित आटो रेन गॉज
- एस बैंड साइक्लोन डिटेक्सन रडार की जगह डापलर रडार लगाने की कोशिश
- आटोमेटिक वेदर स्टेशन, पूरे देश में नेटवर्क स्थापित करने की है तैयारी

कई देश कर चुके हैं तैयारी
फ्लेश फ्लड का दंश झेल रहे अमेरिका और यूरोप के तमाम देशों ने खतरे की पूर्व चेतावनी का पूरा नेटवर्क विकसित कर लिया है। अमेरिका में राष्ट्रीय स्तर पर उपग्रहों का उपयोग कर तथ्यात्मक जानकारी जुटाई जाती है। इसके बाद स्थानीय स्तर पर निगरानी तंत्र विकसित किया गया हैं। इनमें आपस में समन्वय स्थापित कर पूर्व चेतावनी जारी की जाती है। इस पूरी व्यवस्था में प्रभावित हो सकने वाले लोगों को भी शामिल किया जाता है।
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