दून के दीपेंद्र सिंह नेगी अपने दम पर कामयाबी की सीढ़ी चढ़ रहे हैं। काठमांडू में सैफ फुटबाल चैंपियनशिप की विजेता अंडर-16 भारतीय टीम के सदस्य दीपेंद्र की राज्य सरकार और खेल विभाग को अब तक कोई सुध नहीं है। छोटी सी उम्र में अंतर्राष्ट्रीय स्तर का टूर्नामेंट जीतने वाले दीपेंद्र को सम्मान तो दूर सरकार से बधाई तक नहीं मिली है।
राजधानी स्थित सीमा द्वार की गलियों में कभी दोस्तों संग शौकिया फुटबाल खेलने वाले दीपेंद्र सिंह नेगी आज अंडर-16 टीम के प्रमुख खिलाड़ी हैं। इन दिनों वह कतर में अंडर-16 एएफसी कप में प्रतिभाग कर रहे हैं। दीपेंद्र के मामा वीएस रावत ने बताया कि छह साल की उम्र में दीपेंद्र ने फुटबाल खेलना शुरू किया था। 2010 में उन्हें पहला स्टेट लेवल टूर्नामेंट खेलने का मौका मिला।
टीम में जगह बनाई
2012 में ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन के देहरादून में हुए ट्रायल में कोलकाता एकेडमी के लिए दीपेंद्र का चयन हुआ। वहां खेल की बारीकियां सीख उन्होंने भारतीय टीम में जगह बनाई है। उनकी पढ़ाई और अन्य खर्चे एआईएफएफ उठा रहा है, लेकिन राज्य सरकार से कोई मदद उन्हें नहीं मिली है। दीपेंद्र के पिता धीरेंद्र सिंह नेगी पौड़ी में हैं, दून में उनका परिवार किराये पर रहता है।