लोकसभा चुनाव में मुसलिम वोटरों को भाजपा से उतना गुरेज नहीं रहा।
मुसलिम बहुल क्षेत्रों में जहां कांग्रेस को अधिक वोट मिलते थे वहां भाजपा ने बाजी मारी। 80 से 93 फीसदी मुसलिम आबादी वाले क्षेत्रों में भाजपा का परचम लहराता रहा।
मंदिर-मसजिद सरीखे मुद्दे हवा
मुसलिम वोटरों ने विकास के मुद्दे पर भाजपा को वोट दिया है। मंदिर-मसजिद सरीखे मुद्दे हवा रहे। भाजपा के जीतने का डर दिखाने वाले राजनीतिक दलों को मुसलिमों ने इस बार कोई तवज्जो नहीं दी।
मुसलिम वोटरों के मिजाज में यह नया ट्रेंड हरिद्वार लोकसभा के धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र में भी नजर आया। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा यहां 10 हजार वोट से हारी थी। यह कांग्रेसियों का गढ़ माना जाता है।
यहां भाजपा को 17857 वोट कांग्रेस से अधिक मिले हैं। मतगणना के पहले राउंड में इस क्षेत्र में कांग्रेस को 397 वोट अधिक मिले थे। इसके बाद हर राउंड में भाजपा आगे रही।
टिहरी लोकसभा क्षेत्र में आने वाले विकासनगर और सहसपुर विधानसभा क्षेत्रों के मुसलिम बहुल गांवों में भाजपा का परचम लहराता रहा।
मुसलिम बहुल गांवों में भाजपा को अच्छा वोट
डाकी, शंकरपुर, रामपुर, लक्ष्मीपुर, सहसपुर, कुशालपुर आदि मुसलिम बहुल गांवों में भाजपा को अच्छा वोट मिला है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की तैयारी की वजह से लोकसभा चुनावों की इन गांवों में कोई हवा नहीं थी।
हरबर्टपुर में नरेंद्र मोदी की रैली के पहले इन गांवों में भाजपा और कांग्रेस का कोई प्रत्याशी नहीं पहुंचा था। डाकी के ग्राम प्रधान मोहम्मद सत्तार और शंकरपुर के इरशाद अहमद ने बताया कि लोकसभा चुनाव की अधिक चर्चा भी नहीं हुई।
ग्राम प्रधानी के चुनाव के मद्देनजर वोटरों की नाराजगी के डर से किसी ने लोकसभा का प्रचार भी नहीं किया। लोगों का कहना है कि वोटरों ने अपने मन से मतदान किया है। विकास के मुद्दे पर लोगों ने खुद ही भाजपा को चुना है।