उत्तराखंड के अशासकीय स्कूलों में टीचर बनने के लिए अभ्यर्थियों को अब अनुभव के अंक नहीं मिलेंगे। पौड़ी जिले में 86 टीचरों की भर्ती में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद शासन की ओर से यह कदम उठाया गया है।
पहले अनुभव प्रमाणपत्र के आधार पर अभ्यर्थी को अधिकतम 25 अंक तक मिलते थे। इसके अलावा स्कूल प्रबंधन की ओर से नियुक्तियों में मनमानी रोकने के लिए इंटरव्यू के अंक भी 25 से घटाकर दस कर दिए गए हैं।
अशासकीय स्कूलों में टीचरों की भर्ती में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े के मामले सामने आ रहे हैं। कई मामलों में अभ्यर्थी बगैर अनुभव के ही स्कूलों से अनुभव प्रमाणपत्र लेकर नियुक्तियां पा रहे हैं। वहीं, स्कूल प्रबंधन की ओर से भी चहेतों को मेरिट में लाने के लिए इंटरव्यू में अधिक अंक देकर उनकी नियुक्ति होती रही है।
इसको देखते हुए शासन ने विनियम 2009 में संशोधन कर टीचर भर्ती में अनुभव के अंकों को समाप्त कर दिया गया है, जबकि मेरिट में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के अंक भी नहीं जुड़ेंगे। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में प्रधानाध्यापक के लिए स्नातक, स्नातकोत्तर, बीएड, पीएचडी, डी लिट एवं एमएड के अधिकतम 80 अंक और अधिकतम दस अंक इंटरव्यू के आधार पर मेरिट बनेगी। इसी तरह इंटरव्यू के अधिकतम 25 अंकों के स्थान पर अब अधिकतम 10 अंक मिलेंगे।
देखने में आया है कि अनुभव प्रमाणपत्र के आधार पर कई अभ्यर्थी कोर्ट चले जाते हैं, लेकिन अब इसे समाप्त कर दिया गया है, अब जो मेरिट में आएगा वही नियुक्ति पा सकेगा।
- आरके कुंवर, शिक्षा निदेशक माध्यमिक शिक्षा
पौड़ी में टीचरों की भर्ती में अनुभव प्रमाणपत्र फर्जी होने का मामला सामने आया था, हालांकि मात्र कुछ टीचरों के प्रमाणपत्र फर्जी मिले, लेकिन इन प्रकरणों के बाद विभाग की ओर से यह कदम उठाया गया है।
- राजे सिंह नेगी, प्रदेश अध्यक्ष उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षक संघ