मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बेरोजगारी भत्ता कार्ड मामले में कांग्रेस के जवाब को अस्वीकार कर दिया है और कार्ड के वितरण और इसके लिए पंजीकरण पर रोक के आदेश को बरकरार रखने के निर्देश दिए हैं। मामले को अग्रिम मार्गदर्शन के निर्वाचन आयोग को भेजा गया है।
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में युवा मतदाताओं को लुभाने के लिए कांग्रेस ने पिछले दिनों बेरोजगारी भत्ता कार्ड जारी किया था। इस कार्ड के वितरण एवं पंजीकरण को प्रलोभन के दायरे में मानते हुए आयोग ने इस पर रोक लगा दी थी। भाजपा ने भी आयोग को इस मामले में शिकायत की थी।
अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय से इस संबंध जवाब मांगा गया था। रविवार को कांग्रेस ने अपना जवाब दाखिल कर दिया। लेकिन चुनाव आयोग ने पार्टी के जवाब को अस्वीकार कर दिया है। इसे कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
आयोग में बेरोजगारी भत्ता कार्ड को लेकर तीन बार अनुमति मांगी गई थी और तीनों बार उसे प्रलोभन के दायरे में मानते हुए लिखित तौर पर मना कर दिया गया था। कांग्रेस पार्टी की ओर से प्रदेश उपाध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट ने जवाब दाखिल किया था।
पार्टी ने तर्क दिया कि पंजाब चुनाव में भी पार्टी ने बेरोजगारी भत्ता कार्ड वितरित किया, वहां आयोग ने रोक नहीं लगाई। बहरहाल, मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कार्ड के वितरण और इसके तहत पंजीकरण पर रोक बरकरार रखा है और अग्रिम मार्गदर्शन के लिए प्रकरण चुनाव आयोग को दिल्ली भेज दिया है।
बेरोजगारी भत्ता के प्रचार के संकल्प पर कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन निर्वाचन के मध्य में पंजीकरण प्रक्रिया और कार्ड के वितरण की अनुमति नहीं दी जा सकती। वितरण एवं पंजीकरण तत्काल रोक लगाई गई है। मामला अग्रिम मार्गदर्शन के लिए आयोग को भेजा गया है।
- राधा रतूड़ी, मुख्य निर्वाचन अधिकारी
आयोग का हुक्म सिर माथे पर। मगर 15 लाख के मामले में तो भाजपा का पंजीकरण निरस्त हो जाना चाहिए। युवा पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित करना कांग्रेस का काम है। युवाओं में कुंठा न हो, इसके लिए जेल भी जाना पड़े तो कोई गुरेज नहीं, परहेज नहीं।
- किशोर उपाध्याय, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष