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आपदाः दावों की निकली हवा, 'बेसुध' हुई सरकार

Wed, 04 Dec 2013 10:16 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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केंद्र सरकार, विश्व बैंक और एशियन डेवलपमेंट बैंक की मदद की राह जोह रही उत्तराखंड सरकार का अपना काम आपदा के पांच माह बाद भी जमीन पर नहीं दिख रहा है।
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गांव के लोगों को टूटी हुई सड़कों, ट्रालियों का सफर का सामना करना पड़ रहा है। पर्यटन को पटरी पर लाने की कवायद अभी शुरू तक नही हो पाई है।

करोडों की योजनाओं की स्वीकृति
प्रदेश सरकार अपने स्तर से केंद्र पोषित योजनाओं के तहत सड़क निर्माण और अन्य आधारभूत ढांचे के निर्माण का काम शुरू कर सकती थी।

केंद्र पोषित योजनाओं के तहत प्रदेश सरकार को 282 करोड़ रुपए की योजनाओं की स्वीकृति मिल चुकी है। ये योजनाएं वे हैं जो चल रही हैं। इसी तरह बाह्य सहायतित योजनाओं में करीब 833 करोड़ रुपए की योजनाओं की स्वीकृति सरकार को मिल चुकी है।

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यूं तो प्रदेश सरकार ने चार धाम यात्रा मार्ग के वैकल्पिक मार्ग निर्माण की बात भी की थी। प्रदेश सरकार ने 30 अक्टूबर से पहले पुनर्वास और पुनर्निर्माण का काम शुरू करने का ऐलान भी किया था।
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इसके साथ ही सर्दियों से पहले लोगों को प्री फेब्रीकेटिड मकान उपलब्ध कराने का दावा किया था। हाल यह है कि अभी तक एक भी मकान नहीं बन पाया है।

सरकार ने इतना जरूर किया कि केंद्र से विशेष सहायता में 7000 करोड़ रुपए का पैकेज हासिल किया। इस पैकेज के अनुश्रवण और क्रियान्वयन के लिए प्रबंधन इकाइयों का गठन कर दिया। पर यह इकाई भी फिलहाल इससे आगे नहीं बढ़ पाई हैं।

ये काम रह गए अधूरे
- प्रदेश सरकार ने बेघर हो चुके लोगों को प्री फब्रीकेटिड आवास बनाकर देने को कहा था। पर यह मामला अब जमीन के पेच में उलझा हुआ है। हाल यह है कि अभी तक यह प्रक्रिया धरातल पर नहीं उतर पाई है। एक भी मकान नहीं बनाया जा सका है।

- प्रदेश सरकार ने आपदा के कारण विस्थापन की कगार पर पहुंचे गांवों का सर्वे कराकर सुरक्षित स्थान विस्थापन के उपलब्ध कराने का दावा किया था। पर यह काम भी एक विशेष प्रकोष्ठ गठित होने तक ही सीमित रह गया।

हाल यह है कि इस बार की आपदा के बाद प्रदेश में विस्थापन की बाट जोहने वाले गांवों की संख्या बढ़कर करीब 400 तक पहुंच गई है। गांवों का विस्थापन तो दूर अभी तक गांवों के सर्वे का काम ही पूरा नहीं हो पाया है।

- 16-17 जून की आपदा के कारण करीब प्रदेश में करीब 2500 किलोमीटर सड़क क्षतिग्रस्त हुई थी। इसमें चार धाम यात्रा मार्ग भी शामिल था। हाल यह है कि चार धाम यात्रा मार्ग पर आवाजाही शुरू हो चुकी है पर गांवों के संपर्क मार्ग बुरे हाल में है।
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सड़कों के क्षतिग्रस्त होने के कारण करीब 4200 गांव संपर्क से कट गए थे। इन गांवों की सड़क अब भी बुरे हाल मे हैं।

- आपदा के कारण करीब दो दर्जन झूला पुल और मोटर पुल क्षतिग्रस्त हुए थे। आपदा के पांच माह बाद भी इनमें से एक भी पुल नहीं बन पाया है। लिहाजा लोगों को ट्रालियों का सहारा लेना पड़ रहा है। कई जगह पर लोगों ने खुद ही अस्थाई पुल बना लिए हैं।

- सरकार ने 30 अक्टूबर तक पुनर्निर्माण का काम शुरू करने का इरादा जताया था। पर नवंबर बीत जाने के बाद भी लोगों को प्री फेब्रीकेटिड मकान नहीं मिले।
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