उत्तराखंड में श्रीनगर के कीर्तिनगर सीएचसी में 10 वर्षों से एक डिलीवरी नहीं हुई है। जबकि यहां डिलवरी के लिए पूरा स्टाफ मौजूद है।
वहीं सीएचसी प्रशासन का कहना है कि मेडिकल कालेज नजदीक होने से लोग यहां डिलीवरी कराने के बजाय मेडिकल कालेज में डिलीवरी करना बेहतर समझते हैं। एसडीएम ने सीएचसी प्रशासन को अपने यहां डिलीवरी (प्रसव) कराने के लिए प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए हैं।
कीर्तिनगर विकासखंड मुख्यालय के समीप स्थित सीएसचसी पर विकासखंड की करीब 50 हजार से अधिक आबादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए निर्भर है। सीएचसी में प्रयाप्त स्टाफ भी मौजूद है। बावजूद इसके यहां पिछले 10 वर्षों से कोई डिलीवरी नहीं कराई गई है। कीर्तिनगर क्षेत्र की डिलवरी यहां सीएचसी होने के बावजूद भी श्रीकोट बेस अस्पताल में कराई जा रही हैं।
पिछले वर्ष इस क्षेत्र में 190 डिलीवरी केस होने का रिकार्ड स्वास्थ्य विभाग के पास है। लेकिन इनमें से एक भी डिलीवरी कीर्तिनगर सीएचसी में नहीं हुई है। सीएचसी प्रभारी डा. धर्मेंद्र उनियाल कहते हैं कि सीएचसी के पांच किमी के दायरे में मेडिकल कालेज है।
जहां स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ तैनात हैं। ऐसे मे लोग सीएचसी में डिलीवरी कराने के बजाय मेडिकल कालेज में डिलीवरी कराना बेहतर समझते हैं। वहीं एसडीएम नुपुर वर्मा ने कहा कि प्रयाप्त स्टाफ होने के बावजूद सीएचसी में डिलीवारी न कराया जाना गंभीर है। सीएचसी प्रशासन को अपने यहां डिलीवरी कराने के लिए प्रचार प्रसार करने के निर्देश दिए गए हैं।