केदारनाथ आपदा में लापता हुए कुल 4110 लोगों के परिजनों को 30 नवंबर तक हर हाल में मृत्यु प्रमाणपत्र और मुआवजा देने की घोषणा प्रदेश सरकार ने की थी।
50 प्रतिशत के परिजनों को न मुआवता न प्रमाण पत्र
लेकिन यह भी अन्य घोषणाओं की तरह ही अधूरी रह गई। अगर आंकड़ों की बात करें तो लापता लोगों में से लगभग 50 प्रतिशत के परिजनों को आज तक मृत्यु प्रमाणपत्र और मुआवजा नहीं भेजा गया।
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आश्चर्य की बात यह है कि अभी तक दिल्ली और महाराष्ट्र के एक भी लापता लोगों को प्रमाणपत्र नहीं भेजा गया। आपदा के करीब साढ़े पांच महीने बाद भी उत्तराखंड सरकार लापता लोगों के परिजनों को राहत नहीं दे पाई।
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि 26 नवंबर तक 1793 लोगों के परिजनों को ही मृत्यु प्रमाण पत्र और मुआवजा भेजा गया, जबकि 2317 लोगों के परिजनों को प्रमाणपत्र अभी भेजना शेष है।
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यह हाल तब है जब सरकार ने सभी लापता के परिजनों को प्रमाणपत्र देने की अंतिम तारीख 30 नवंबर मुकर्रर की थी। दूसरे राज्यों की बात छोड़ दे तों उत्तराखंड से लापता 655 लोगों में से अभी तक 67 लोगों के परिजनों को न तो मृत्यु प्रमाणपत्र मिला और न ही मुआवजा।
यूपी की सूची ने खड़ी की परेशानी
हालांकि अधिकारियों का कहना है कि लापता लोगों के वेरीफिकेशन का काम जटिल है साथ ही कुछ राज्यों के आंकड़ों से मामला उलझा रहा है। सबसे अधिक परेशानी यूपी की सूची ने खड़ी कर दी।
एक ही व्यक्ति की कई जगह रिपोर्ट दर्ज होने से आंकड़ा बढ़ता घटता रहा। 1150 में से अभी तक सिर्फ 209 लोगों को ही प्रमाणपत्र भेजा जा सका। हालांकि जिन राज्यों से एक दो लोग लापता थे उनको प्रमाणपत्र और मुआवजा भेजा जा चुका है।
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