नई शिक्षा नीति के तहत शिक्षा विभाग के आदेश ने अप्रैल के आखिरी शनिवार को सभी बोर्डों के बच्चों के लिए एक यादगार मस्ती भरा त्योहार बना दिया। शहर के लगभग सभी विद्यालयों ने इस दिन को बैगलेस डे यानी बस्ता रहित दिवस के रूप में मनाया गया। इस खास दिन बच्चों के कंधों से बस्ते का बोझ उतरने पर उनके चेहरों पर खिलती मुस्कान दिखाई दी।
बैगलेस डे के दौरान विद्यालयों ने बच्चों के लिए कविता पाठ, भाषण प्रतियोगिता, बागवानी, रंगोली निर्माण, ऑरेगेमी, चित्रकला, मेहंदी और विभिन्न खेलों जैसी रचनात्मक गतिविधियां आयोजित की गईं। छात्रों ने न केवल खुलकर अपनी प्रतिभा दिखाई, बल्कि समूह गतिविधियों के माध्यम से टीम वर्क और रचनात्मक सोच का भी अभ्यास किया। कहीं बच्चे रंगों से खेलते नजर आए तो कहीं फूलों के पौधे रोपते। हालांकि कई निजी विद्यालयों के बच्चे इस दिन भी बैग के साथ नजर आए। इस पर प्रबंधकों ने कहा, विद्यालय की ओर से अभिभावकों को सूचित किया गया था लेकिन कई अभिभावकों ने समय पर मैसेज न देखने से बच्चों को बस्ते के साथ भेजा।
Iक्या बोले अभिभावक
I
सरकार का यह कदम शिक्षा की दिशा में एक सकारात्मक पहल है। गतिविधियों के माध्यम से बच्चे जल्दी और बेहतर सीखेंगे। - पार्वती
यह एक सराहनीय पहल है। इससे बच्चों को अपने भीतर छिपे हुनर को पहचानने और शिक्षकों को उसे निखारने का मौका मिलेगा। - सुचिता
नो बैग डे पर कराई जाने वाली गतिविधियां, बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाएगी। बच्चे बिना बैग स्कूल आने पर बहुत खुश हैं। - पुष्पा
Iक्या बोले शिक्षक
I
नो बैग डे पर बच्चों में खुशी और ऊर्जा अन्य दिनों के मुताबिक ज्यादा देखने को मिली। विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लेकर बच्चों ने न सिर्फ अपनी रचनात्मकता को दर्शाया बल्कि सहयोग और आत्मविश्वास भी महत्ता भी जानी। - रामेश्वरी बड़वाल
बस्ता रहित दिवस बच्चों के लिए केवल छुट्टी का दिन नहीं, बल्कि आत्म-अभिव्यक्ति और रचनात्मक विकास का उत्सव बन गया है। जो यकीनन उन्हें एक बेहतर विद्यार्थी के साथ - साथ एक बेहतर इंसान बनाने में मदद करेगा - रुचि चमोली
सरकार की यह पहल शिक्षा के क्षेत्र में एक रचनात्मक आयाम स्थापित करेगी। नो बैग डे पर निर्धारित गतिविधियां बच्चों के लिए पढ़ाई को रोचक बनाने में मददगार साबित होंगी। - प्रेमलाल भारती, जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक
Iअगले महीनों से की जाएगी विद्यालयों की मॉनिटरिंग - मुख्य शिक्षा अधिकारी
I
मुख्य शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार ने कहा, बस्ता रहित दिवस का आयोजन बच्चों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक अभिनव और सराहनीय प्रयास है। इससे न केवल उनकी प्रतिभा को मंच मिला, बल्कि उनके भीतर आत्मविश्वास, सहयोग और रचनात्मकता जैसी महत्वपूर्ण क्षमताओं का भी विकास होगा। बताया, शनिवार को पहली बार नो बैग डे आयोजित हुआ है लेकिन भविष्य में इस दिवस के सुचारु और सफल आयोजन के लिए अगले महीने से विभाग की ओर से सभी विद्यालयों की मॉनिटरिंग की जाएगी।
नौ बैग डे मनाने का निर्णय एनईपी 2020 के क्रियान्वयन से जुड़ा हुआ है, यह बच्चों को आम कक्षा से इतर प्रोजेक्ट वर्क, खेल, व्यावसायिक शिक्षा इत्यादि गतिविधियों से जोड़ने के साथ ही उनमें क्रिटिकल थिंकिंग, संवाद क्षमता, रचनात्मकता का विकास करने में मददगार साबित होगा। -बिमल रतूड़ी, काउंसलर (मानसिक स्वास्थ्य)