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देश के पांच ‘हीरो’ का देहरादून में सम्मान

Wed, 03 Dec 2014 03:54 PM IST
प्रवेश कुमारी/ अमर उजाला, देहरादून
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देश के पांच ‘हीरो’ का देहरादून में सम्मान हुआ। उल्लेखनीय कार्य करने वाले देश के पांच दृष्टिबाधितों को एनआईवीएच उत्कृष्टता पुरस्कार से नवाजे जाने का फैसला किया था। इनमें चार दिल्ली और एक बंगलूरू का नाम शामिल हैं।
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राजपुर रोड स्थित राष्ट्रीय दृष्टिबाधितार्थ संस्थान (एनआईवीएच) में अंतर्राष्ट्रीय विकलांग जन दिवस पर बुधवार को प्रदेश के राज्यपाल डॉ. अजीज कुरैशी ने यह सम्मान दिया।

इन्हें मिला सम्मान-
डॉ. प्रेम सिंह :
डीयू की पहली महिला ब्लाइंड प्रोफेसर
डॉ. प्रेम सिंह इसी साल दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी विभाग की अध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त हुईं। द्वारका, नई दिल्ली निवासी प्रेम सिंह के नाम दिल्ली विश्वविद्यालय की पहली ब्लाइंड महिला प्रोफेसर होने का गौरव दर्ज है। 12 जुलाई, 1949 को जन्मीं प्रेम सिंह ने 1972-73 में बीआरए से अध्यापक प्रशिक्षण प्राप्त किया।
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1976-77 में परकिंस स्कूल फार द ब्लाइंड, बोस्टन (यूएसए) से डिप्लोमा हासिल किया। फिर पीएचडी, डीलिट। हिंदी साहित्य पर अनेक पुस्तकें रचने वालीं प्रेम सिंह को कविता संग्रह ‘बर्फ के टुकड़े’, ‘मैं अपने साथ’ के लिए काफी सराहना मिली। 1985 में उन्हें राष्ट्रपति के हाथों पुरस्कृत किया गया। बीते साल एक बार फिर राष्ट्रपति ने उत्कृष्ट सृजनशील व्यक्ति का पुरस्कार दिया।

एल सुब्रह्मणयम :
देश के पहले दृष्टिबाधित खेल पत्रकार
एल सुब्रह्मण्यम प्रौद्योगिकी और खेलों पर लिखने वाले देश के पहले दृष्टिबाधित पत्रकार हैं। 6 जुलाई, 1973 में जन्में सुब्रह्मण्यम ने लोयला कालेज, चेन्नई से अंग्रेजी साहित्य से एमए किया। भवन कालेज आफ जर्नलिज्म, राजाजी स्कूल आफ कम्युनिकेशन, चेन्नई से स्नातकोत्तर डिप्लोमा लिया।

1998 में न्यू इंडियन एक्सप्रेस से प्रशिक्षु पत्रकार के रूप में करियर शुरू करने वाले सुब्रह्मणयम इस वक्त बंगलूरू में डेक्कन हेराल्ड के साथ जुड़े हैं। उनके सेमीकंडक्टर्स, साफ्टवेयर सर्विसेज, इंटरप्राइजेज, आईटी आदि पर लिखे लेखों ने प्रशंसा बटोरी है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों, अभावग्रस्त वर्गों पर भी उन्होंने लेख लिखे।

जीवनकाल के दौरान दृष्टिहीन हुए व्यक्तियों के लिए कार्यरत संस्था रेटिना इंडिया के वह सह-संस्थापक हैं। दृष्टिबाधितों के लिए पुस्तकेंसुगम बनाने का अभियान चला रहे हैं।

मोनिका शर्मा :
अखिल भारतीय टापर, कंपनी की लाइफ लाइन
21 फरवरी, 1980 में जन्मीं मोनिका शर्मा सौ फीसदी दृष्टिबाधित हैं। इसके बावजूद उन्होंने संघर्ष की राह नहीं छोड़ी। 12वीं में मनोविज्ञान में 97 प्रतिशत अंक लेकर उन्होंने अखिल भारतीय टापर होने का गौरव प्राप्त किया।

लेडी श्रीराम कालेज, दिल्ली से स्नातक उत्तीर्ण होने केबाद उन्होंने एजुकेशन में डिग्री ली और इसके बाद एनएबी में संसाधान अध्यापिका के रूप में नियुक्ति पाई। आईबीएम में उन्होंने वाणी और उच्चारण प्रशिक्षक के रूप में नियुक्ति हासिल की। यहां वह फोन मेंटरिंग की अहम परियोजना का हिस्सा बनीं, जिससे कंपनी को 2011 में पहले छह माह में ही 179000 डालर का लाभ हुआ।

हिप्नोथेरेपी और थीटा हीलिंग में भी बराबर अधिकार रखने वाली मोनिका को फिक्की महिला संगठन ने बीते साल महिला एचीवर्स पुरस्कार दिया। इसी साल  उन्हें एनएबी मुंबई की ओ से नीलम कांगा पुरस्कार हासिल हुआ।

बलदेव गुलाटी :
ग्रासरी इंटरप्राइजेज के रूप में दृष्टिबाधितों को दिया सहारा
अमेरिका इंडियन फाउंडेशन (एआईएफ), एलसीडी जैसी संस्थाओं से कंसल्टेंट के रूप में जुड़े रहे बलदेव गुलाटी इस वक्त मसालों और ग्रासरी प्राइडक्ट्स का इंटरप्राइज चला रहे हैं, जो शैक्षिक संस्थाओं, दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान में कारपोरेट आफिसों की जरूरत पूरी कर रहे हैं।

महावीर नगर, दिल्ली में रह रहे बलदेव के इस इंटरप्राइजेज से 1000 से अधिक परिवारों का काम चल रहा है। नौ दृष्टिबाधित, चलने-फिरने, बोलने में असमर्थ कुल 13 कर्मचारियों को जगह मिली है।

हिंदू कालेज दिल्ली से 1991 में स्नातक और 1995 में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल करने वाले बलदेव बीते 10 साल से विकलांगता पर्सनैलिटी डेवलपमेंट और एचआईवी एड्स पर ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित कर रहे हैं।

रिसोर्स मैनेजमेंट, ट्रेनिंग कोर्स और माइक्रो इंटरप्राइजेज के लिए बलदेव को जाना जाता है। कई यूनिवर्सिटी में व्याख्यान देने के साथ ही उनके कई रिसर्च पेपर भी प्रकाशित हुए हैं।

अवनीश सिंह :
आईआईएम पास आउट यह तकनीकी विशेषज्ञ लाजवाब
साफ्टवेयर डेवलपर अवनीश सिंह को उनकी तकनीकी विशेषज्ञता के लिए जाना जाता है। द्वारका, नई दिल्ली में रह रहे और 22 जनवरी, 1978 को जन्में अवनीश ने जीजीएस इंद्रप्रस्थ्थविश्वविद्यालय से 2003 में कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग में बीटेक किया। रेटिनल डिजनरेशन उनके कार्य में बाधा नहीं बना।

उन्होंने इसके बाद भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) कोझीकोड़ से 2011 में एक्जीक्यूटिव स्नातकोत्तर डिप्लोमा हासिल किया। डेजी कंजर्टियम में साफ्टवेयर डेवलपर के रूप में करियर प्रारंभ करने वाले अवनीश ने टेक्निकल साल्यूशन के क्षेत्र में धाक जमाई।

इसे देखते हुए डेजी कंजर्टियम ने उन्हें स्ट्रेटेजिस्ट (इंटरनेशनल प्लानिंग) के रूप में पदोन्नत किया हे। दृष्टिबाधितों को पढ़ने के नए उपकरण मुहैया कराने में उनकी कोशिशें रंग ला रही हैं।
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