10 दिन बाद अपना 18वां जन्मदिवस मनाने जा रहे राज्य आंदोलनकारियों के सपनों के उत्तराखंड ने देश में सामाजिक प्रगति में नए आयाम स्थापित किए हैं। केरल, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु के बाद उत्तराखंड ने सामाजिक प्रगति सूचकांक में देश में चौथा स्थान हासिल किया है। यह सूचकांक केंद्र सरकार की आर्थिक सलाहकार परिषद् और नीति आयोग के निर्देशों पर तैयार हुआ है।
खास बात यह है कि कई मामलों में उत्तराखंड कई बड़े और पुराने राज्यों से भी आगे निकल गया है। तरक्की के इस सूचकांक में उत्तराखंड ने पंजाब, दिल्ली, कर्नाटक, हरियाणा और गुजरात जैसे राज्यों को भी पीछे छोड़ दिया है।
यह सूचकांक इंस्टीट्यूट फॉर कांपिटीटिवनेस ने तैयार किया है, जो वर्ष 2005 से 2016 के बीच की प्रगति को बयां करता है। सूचकांक के मुताबिक, बिहार देश में सामाजिक प्रगति के लिहाज से सबसे पिछड़ा राज्य है। उत्तराखंड का स्कोर 64.23 है तो वहीं बिहार का स्कोर 44.89 है। पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश का सामाजिक प्रगति स्कोर 50.96 है।
सामाजिक प्रगति सूचकांक
सामाजिक प्रगति सूचकांक में सामाजिक प्रगति के विभिन्न मानकों के हिसाब से राज्यों को अंक दिए गए हैं। सूचकांक तैयार करते हुए बुनियादी मानव जरूरतें, पोषाहार और स्वास्थ्य सेवाएं, निजी सुरक्षा, बुनियादी ज्ञान आदि विभिन्न पैमानों पर इसका आकलन किया गया है।
रिपोर्ट में देश के राज्यों को उनकी प्रगति के स्कोर के हिसाब से तीन समूहों में बांटा गया है। पहला समूह उन राज्यों का है जहां सामाजिक प्रगति सबसे अधिक हुई है। दूसरा समूह मध्यम प्रगति वाले राज्यों और तीसरा समूह सबसे पिछड़े राज्यों का है।