एनआईटी (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) उत्तराखंड के अस्थायी कैंपस के ऋषिकेश में शिफ्टिंग की तैयारी के विरोध में विभिन्न संगठनों ने एनआईटी प्रशासन, केंद्र व राज्य सरकारों के पुतले फूंके। संगठनों ने इसके लिए मुख्यमंत्री और क्षेत्रीय विधायक को जिम्मेदार मानते हुए इस्तीफा देने की मांग की।
एनआईटी उत्तराखंड में विगत तीन अक्तूबर से छात्र कैंपस शिफ्टिंग की मांग के लिए कक्षाओं का बहिष्कार कर रहे हैं। एनआईटी प्रशासन ने आंदोलन को देखते हुए विकल्प के तौर पर ऋषिकेश में एक शिक्षण संस्थान को चिह्नित किया है। मीडिया में यह खबर प्रकाशित होने के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा भड़क उठा।
मंगलवार अपराह्न एक बजे प्रगतिशील जनमंच के बैनर तले स्थानीय लोग एनआईटी गेट पर पहुंचे, जहां उन्होंने एनआईटी प्रशासन और केंद्र व राज्य सरकार के विरोध में प्रदर्शन करते हुए पुतला फूंका। इस मौके पर कहा गया कि स्थायी कैंपस के निर्माण हेतु जनता लगातार आंदोलन कर रही है। इसके विपरीत कैंपस को मैदानी क्षेत्र में शिफ्टिंग की बात की जा रही है।
प्रदर्शनकारियों में में मंच के अध्यक्ष अनिल स्वामी, कांग्रेस के मुख्य प्रचार समन्वयक धीरेंद्र प्रताप, सुरजीत बिष्ट, सदानंद पुरी, उम्मेद सिंह मेहरा, संजय फौजी और जेपी रतूड़ी आदि शामिल थे। अपराह्न करी दो बजे कांग्रेस नगर कमेटी ने भी मानव संसाधन विकास मंत्री का पुतला फूंका। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि डबल इंजन की सरकार एनआईटी शिफ्ट करने की साजिश कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे ही पहाड़ में संस्थान बंद किए जाएंगे, तो पलायन कहां से रुकेगा।
पहाड़ में विकास अवरुद्ध हो जाएगा। पुतला फूंकने वालों में भूपेंद्र पुंडीर, प्रांतीय प्रवक्ता प्रदीप तिवाड़ी, जिला महामंत्री गणपति भट्ट, वीरेंद्र नेगी, राजेश जुगरान, मुकेश अग्रवाल और कमल रावत आदि शामिल थे। वहीं एनआईटी शिफ्टिंग के विरोध में प्रगतिशील जनमंच के बैनर तले 16 नवंबर को मशाल जुलूस निकाला जाएगा, जबकि तीन दिसंबर को महापंचायत का आयोजन होगा। मंच ने कहा कि राजनीतिक जनप्रतिनिधियों को क्षेत्र में नहीं घुसने दिया जाएगा। उधर, कांग्रेस एनआईटी गेट के समक्ष धरना देगी।