भाकपा (माले) ने एनआईटी के स्थायी कैंपस निर्माण न होने के लिए सरकारों और छात्रों के आंदोलन के लिए एनआईटी प्रशासन को दोषी ठहराया है। पार्टी के राज्य कमेटी सदस्य इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि पिछले नौ साल से सरकार स्थायी कैंपस का निर्माण नहीं कर पाई है। सरकार के नकारापन से संस्थान के छात्र-छात्राएं स्थायी कैंपस, हॉस्टल, प्रयोगशाला और इंडस्ट्री एक्सपोजर से वंचित हैं।
उनकी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए, लेकिन सवाल यह है कि क्या कैंपस को अन्यत्र स्थानांतरित करने से उनको यह सुविधाएं मिलने लगेंगी। शिफ्टिंग की मांग छात्रों से ज्यादा यहां काम करने वाले अधिकारियों व शिक्षकों की लग रही है। मैखुरी ने कहा कि प्रोफेशनल संस्थानों में पढ़ने वाले छात्र कक्षाओं का बहिष्कार तो दूर, अपने शिक्षकों की मर्जी के बिना एक नारा भी नहीं लगा सकते। ऐसे में कक्षाओं का बहिष्कार कर छात्रों का घर चले जाना सवाल खड़े करता है।
एनआईटी में कक्षाएं शुरू कराने की मांग
प्रगतिशील जनमंच ने जिला प्रशासन से एनआईटी परिसर खुलवाने और शिक्षण कार्य प्रारंभ करवाने की मांग की है। मंच ने संस्थान के कतिपय अधिकारियों व फैकल्टी की गतिविधियों की जांच के साथ ही उनका स्थानांतरण करवाने की भी मांग की है। मंच के अध्यक्ष अनिल स्वामी ने प्रेस को जारी बयान में कहा कि बीटेक प्रथम वर्ष के छात्रों को एनआईटी प्रशासन के अधिकारी और सीनियर छात्र परिसर में नहीं घुसने नहीं दे रहे हैं।