आपदा प्रबंधन को लेकर उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पहले भी इस बात की मांग हो चुकी है यदि सरकार गंभीर है तो जान माल के नुकसान पर श्वेतपत्र जारी करे।
उन्होंने कहा कि सरकार का रवैया इतना क्रूर है कि शवों को निकालने का ठेका दिया गया। वह भी ऐसी कंपनी को जो कि पहले से ही प्रदेश में ब्लैक लिस्टेड है।
अपने आवास पर पूर्व मुख्यमंत्री डा.रमेश पोखरियाल निशंक ने साफ कहा कि अटल खाद्यान्न योजना के तहत भाजपा ने शत प्रतिशत लोगों के भोजन की व्यवस्था की थी। लेकिन अटल खाद्यान्न योजना को किनारे कर के राजीव गांधी के नाम से योजना लागू कर दी गई।
सरकार को यह बताना चाहिए कि अटल खाद्यान्न योजना का नाम बदलकर राजीव गांधी रखा है या फिर उसे बंद कर दिया गया है। निशंक ने कहा कि हमारी योजना को अपने विजन में शामिल कर लिया, लेकिन अभी भी मात्र 62 प्रतिशत लोगों को ही इसका लाभ मिलने की संभावना है।
दैवी आपदा पर निशंक ने श्वेतपत्र जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि केदारनाथ, रामबाड़ा व गौरीकुंड क्षेत्र से दो महीने बाद भी हजारों लोगों के शव नहीं निकाले जा सके। शव निकालने का ठेका भी ईपीआईएल नाम की ऐसी कंपनी को दिया जो कि काली सूची में शामिल है।
यह सारी धंधेबाजी एक वरिष्ठ नौकरशाह कर रहा है। भाजपा इसका हिसाब किताब लेगी। केंद्र व राज्य की सरकार पूरी तरह से आंखें मूंदकर बैठी है। देश की सीमाएं सुरक्षित नहीं और उत्तराखंड जैसे पर्वतीय प्रदेश में भी जंगलराज जैसे हालात हो गए है। मुख्यमंत्री ने एक महीना पहले घोषणा की थी लेकिन अभी तक आपदा में बेघर हुए लोगों को प्री-फेब्रिकेटेड घर उपलब्ध नहीं कराए जा सके।
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