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देवभूमि में भी बेटियों पर कम नहीं हो रहे अपराध, पांच साल में 1779 बच्चियां बनी दरिंदगी का शिकार

Sun, 16 Dec 2018 08:45 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
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निर्भया कांड के बाद सख्त हुए कानून से माना जा रहा था कि अपराधों में कमी आएगी, मगर कांड के बाद से अब तक प्रदेश में कुल 1779 बच्चियां दरिंदगी का शिकार हुई हैं। हालांकि सुकून की बात यह है कि दुष्कर्मियों को सजा दिलाने में खासी तेजी आई है।

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इन पांच सालों में 366 अपराधियों को कानून सजा दे चुका है। राजधानी देहरादून में ही पिछले एक साल में दुष्कर्म और हत्या जैसे जघन्य अपराधों में तीन लोगों को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। 

2012 के 16 दिसंबर की रात राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में निर्भया के साथ दरिंदों ने जो कुछ किया, उससे पूरा देश हिल गया था। घटना के बाद देश में आए उबाल से दरिंदों के खिलाफ सख्ती हुई। उन्हें गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा गया।
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इसके बाद से दुष्कर्म के मामले में आरोपियों को कड़ी सजा दिलाए जाने की बहस भी शुरू हो गई। नाबालिग बच्चियों को दरिंदगी का शिकार बनने वालों के खिलाफ पोेक्सो कानून बना और देश भर में फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन कर कड़ी सजा दिलाने का प्रावधान हुआ । 

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आंकड़ों की स्थिति

ऐसा माना जा रहा था कि कानून बनने के बाद अपराधों में कमी आएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बल्कि अपराधों में लगातार बढ़ोतरी ही होती जा रही है। प्रदेश में भी कमोबेश यही स्थिति है। 

वर्ष    केस दर्ज    सजा    लंबित
2013    101    18    28
2014    304    31    58
2015    290    54    96
2016    338    93    372                    
2017    440    123    495
2018 (जून तक)    306    47    520
कुल    1779    366    1569 
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