बता दें कि केरल में निपाह वायरस से मौतों की सूचना के बाद सावधानी बरतने की हिदायतें जारी की गई हैं। वहीं उपायुक्त सिरमौर ललित जैन का कहना है कि मृत चमगादड़ों के सैंपल लिए गए हैं। सैंपलों को जांच के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरल डिजिजिस जालंधर भेजा जाएगा। कुछ सैंपल पुणे लैब भी भेजे जा सकते हैं।
ललित जैन ने कहा कि निपाह वायरस जैसी कोई बात नहीं है। गर्मी की वजह से चमगादड़ों की मौत हुई है। इस बारे में विशेषज्ञों से भी राय ली गई है। इस वायरस से चमगादड़ नहीं मरते जबकि वह सिर्फ वायरस फैलाते हैं। फिर भी एहतियात के तौर पर सैंपल लिए गए हैं।
क्या है निपाह वायरस
निपाह एक जूनोसिस वायरस है। यह चमगादड़ के जरिए फल व सब्जी में जाता है और इनका प्रयोग करने से यह इंसानों में आ जाता है। यह सीधा जानवरों के माध्यम से भी इंसानों में प्रवेश करता है। इसकी सबसे बड़ी समस्या है कि यदि इसके मरीज को उच्च स्तर के आइसोलेशन में न रखा जाए तो एक से दूसरे व्यक्ति को इसका शिकार होने में अधिक समय नहीं लगता।
यह अधिकांश उन लोगों को अपना शिकार बनता है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। यह वायरस देश में पहली बार जनवरी 2001 में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में आया था। यह अप्रैल 2007 में बंगाल के नादिया तक पहुंच गया था। वहीं एक्सपर्ट की मानें तो इस वायरस का कोई स्थायी समाधान तो नहीं है, लेकिन रिबावैरिन गोली का प्रयोग कर सकते हैं।
बीमारी के लक्षण
सांस लेने में समस्या, तेज बुखार, दिमाग में गर्मी, आलस आना, भ्रमित होना, सर्दी-जुखाम, बदन दर्द, सिर दर्द, उल्टी आना, पेद दर्द, खांसी आना, अचानक सांस फूलना, चक्कर आना, झटके आना, बेहोशी आना, कोमा में जाना
फेफड़े व तंत्रिका तंत्र पर अटैक
निपाह वायरस नया उभरता हुआ संक्रमण है। यह वायरस सीधे फेफड़े व तंत्रिका तंत्र पर अटैक करता है। अधिकतर मरीजों की मौत फेफड़े की कार्यक्षमता पर प्रभाव पड़ने से होती है। इस वायरस की चपेट में आने के बाद बहुत से मरीजों को इलाज के दौरान आईसीयू व वेंटीलेटर की जरूरत पड़ती है।
इन बातों का रखें ध्यान
खजूर व नारियल का इस्तेमाल सावधानी पूर्वक करें। कटे फल के सेवन से बचना चाहिए। खाने की वस्तुएं चमगादड़ से संक्रमित न हों, नारियल से बनने वाली चीजों से परहेज करें, हाथ अच्छे से धोएं और बीमार मरीज से दूर रहें, बीमार मरीज के बिस्तर व बर्तन, कपड़े अलग रखें, बीमारी से मृत व्यक्ति के शव को छूने में सावधानी रखें।
डीएफओ देहरादून राजीव धीमान का कहना है कि इस तरह का कोई मामला अभी सामने नहीं आया है। लोगों को पैनिक होने की जरूरत नहीं है। इस मामले में वन विभाग नजर रख रहा है।