काम चाहे जितना मुश्किल हो, सफलता में उम्र बाधा नहीं बन सकती, बशर्ते इरादा पक्का होना चाहिए। पहाड़ की वादियों से निकलकर आई यह मिसाल यही साबित करती हैं।
उत्तराखंड के इन युवाओं ने छह माह से खराब पड़े रास्ते को ठीक कर दिया है। बिहार के दशरथ मांझी ने अकेले पहाड़ काट कर रास्ता बना दिया था। इन युवाओं ने कुछ ऐसा नहीं किया है, लेकिन इनकी इस पहल से उन लोगों का सीख मिली है जो हर बात के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराते हैं।
छह माह पूर्व बारिश से क्षतिग्रस्त जिस पैदल रास्ते और दीवार को बनाने के लिए चमोली की नगर पंचायत पोखरी बजट का रोना रो रही थी, उसे कर्नल अजय कोठियाल निशुल्क भर्ती केंद्र के 60 युवाओं ने श्रमदान कर दो दिनों में बना डाला।
12 अगस्त से जीआईसी नागनाथ पोखरी के छात्रावास में निम की ओर से आर्मी जीडी भर्ती पूर्व प्रशिक्षण कैंप चलाया जा रहा है। कैंप का पहुंच मार्ग बीती फरवरी में हुई बारिश के बाद से क्षतिग्रस्त पड़ा हुआ था।
यही मार्ग देवर, ऑली और झलोटी गांवों की पैदल आवाजाही का भी मुख्य साधन है और जीआईसी नागनाथ के छात्र-छात्राएं भी इसी क्षतिग्रस्त पैदल मार्ग से आते-जाते हैं। पोखरी से रास्ते के सुधारीकरण की मांग पर पंचायत के अधिकारी बजट की कमी बताते रहे।