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हाईकोर्ट में रुड़की नगर निगम चुनाव के मामले में स्पेशल बैंच गठित, 22 अक्टूबर तक मांगा जवाब

Tue, 16 Oct 2018 02:59 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रुड़की
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nainital high court
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हाईकोर्ट में रुड़की नगर निगम की चुनाव अधिसूचना जारी न होने के मामले में न्यायमूर्ति मनोज तिवारी की विशेष पीठ ने मंगलवार को सुनवाई की। पीठ ने सरकार को 22 अक्तूबर तक जवाब देने का आदेश देते हुए पूछा है कि रुड़की नगर निगम को क्यों छोड़ा गया।

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रुड़की नगर निगम के निवर्तमान मेयर यशपाल राणा की याचिका को महत्वपूर्ण मानते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा ने विशेष पीठ के गठन का आदेश दिया था। इसी आदेश के तहत न्यायमूर्ति मनोज तिवारी की पीठ ने मामले की सुनवाई की। याची का कहना था कि राज्य सरकार ने चुनाव में रुड़की को छोड़ दिया है।

14 अक्तूबर को राज्य सरकार ने राज्य में निकायों के लिये अधिसूचना जारी की और 15 अक्तूबर को राज्य में निकाय चुनावों की घोषणा की। याची ने सभी नगर निगमों में एक साथ चुनाव कराने की मांग की और कहा कि राज्य सरकार ने रुड़की निगम को चुनाव से अलग कर गलत किया है। इससे अन्य निगमों में भी आरक्षण का क्रम बदल जायेगा।
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ज्ञात हो कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2015 में रुड़की नगर निगम का सीमा विस्तार करते हुए पाड़ली गुर्जर और रामपुर गांव को शामिल किया था, लेकिन भाजपा सरकार ने 2017 में इस आदेश में फेरबदल कर दोनों गांवों को निगम से बाहर कर दिया। इसके खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने दोनों गांव को बाहर निकालने के सरकार के आदेश पर रोक लगा दी थी। यही नहीं प्रदेश सरकार ने 11 मई 2018 को नगर निकायों के आरक्षण की प्राथमिक अधिसूचना जारी कर जनता से आपत्तियां मांगी, जिसमें नगर निगम रुड़की को शामिल नहीं किया गया था। इस पर हाईकोर्ट ने 25 मई 2018 को रुड़की सहित सभी निकायों में एक साथ आरक्षण प्रक्रिया शुरू करने को कहा था, लेकिन प्रदेश सरकार की ओर से रुड़की निगम में आरक्षण की प्रक्रिया पूरी करने से पहले ही 24 नए गांवों को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। इसके बाद रुड़की को छोड़ते हुए प्रदेश के अन्य निकायों में चुनाव की घोषणा कर दी। इससे रुड़की में राजनीतिक पारा अचानक चढ़ गया है। मेयर के नैनीताल पहुंचते ही राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है।  

मतदाताओं के संतुलन को साधने की कोशिश 
दरअसल, पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की ओर से निगम में जिन दो गांवों पाड़ली गुर्जर और रामपुर को शामिल किया था, उसमें अल्पसंख्यक मतदाताओं की संख्या ज्यादा है और यह कांग्रेस का कैडर वोट माना जाता है। अब भाजपा ने 24 नए गांवों को शामिल करने की प्रक्रिया शुरू करते हुए मतदाताओं का संतुलन अपने पक्ष में करने की कोशिश है, लेकिन पूर्ववर्ती कांग्रेस और वर्तमान भाजपा सरकार के पक्ष में यह फेरबदल कितना रंग लाता है, यह आने वाला समय ही बताएगा।  

राज्य सरकार की ओर से चुनाव की अधिसूचना हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना है। इस फैसले के खिलाफ नैनीताल पहुंचा हूं, जल्द हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की जाएगी।  

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- यशपाल राणा, निवर्तमान मेयर

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