बेटे को देखकर पिता की आंखें भर आईं
अब्दुल समद को लेकर जैसे ही एनआईए की टीम बुक्कनपुर गांव पहुंची तो परिजन और ग्रामीण अवाक रहे गए। बेटे को पुलिस से घिरा देखकर पिता राशिद की आंखें भर आईं। राशिद ने कहा कि उसका बेटा आतंकी नहीं है।
वह एक सीधा-सादा मजदूर है। बेटे को तो हवाला क्या होता है, इसका भी पता नहीं। बकौल राशिद, हां, यह सच है कि मेरा बेटा विदेशों में रह रहे स्थानीय और आसपास गांव के लोगों के बच्चों से आ रही रकम को पांच माह से उनके परिजनों तक पहुंचा रहा था, लेकिन उसे नहीं पता था कि यह कोई गुनाह है।
पिता ने टीम को उन सभी लोगों के नाम बताए, जिन लोगों तक पैसा पहुंचाया गया। वहीं, अब्दुल के पड़ोसियों को भी विश्वास नहीं है कि खेतों में काम करने वाला अब्दुल किसी आतंकी गतिविधियों में संलिप्त हो सकता है।
यह है आरोप
सऊदी अरब से हवाला के जरिए प्राप्त रकम को आतंकी फंडिंग के लिए जारी करने के आरोप में अब्दुल समद को गिरफ्तार किया गया है। हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि रकम को अब्दुल ने जिन लोगों को दिया है, उसका इस्तेमाल क्या वाकई में देश विरोधी गतिविधियों के लिए हुआ है या नहीं।
मंगलौर में नहीं हुआ अब्दुल का मेडिकल
लंढौरा पुलिस चौकी में पूछताछ के बाद एनआईए टीम मंगलौर कोतवाली पहुंची और फिर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र। स्वास्थ्य केंद्र में टीम ने अब्दुल का मेडिकल कराने की बात की, लेकिन चिकित्सक नहीं होने से टीम रुड़की सिविल अस्पताल पहुंची। मेडिकल कराने के बाद टीम लौट गई।
डायरी में लिखी थी रकम देने की बात
एनआईए टीम ने अब्दुल के घर पहुंचकर तलाशी ली। इस दौरान टीम को उसके घर से एक डायरी मिली, जिसमें उन लोगों के नाम और मोबाइल नंबर लिखे हुए थे, जिन्हें अब्दुल समद ने हवाला के जरिए रकम मुहैया कराई थी। इसके अलावा, टीम ने चंडीगढ़ के टिकट भी बरामद किए। इस बाबत अब्दुल समद के पिता राशिद से भी पूछताछ की गई। राशिद ने बताया कि जिन लोगों को रकम दी गई है उनका नाम डायरी में लिखा गया है।