एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाला के आरोपी भूमि अध्याप्ति अधिकारी (एसएलओ) डीपी सिंह को 14 माह 24 दिन बाद सोमवार शाम नैनीताल जेल से रिहा कर दिया गया। डीपी सिंह ने कहा कि यह बड़ा षड्यंत्र है। वह निर्दोष हैं। मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए उन्होंने घोटाले के बारे में कुछ भी बताने से इनकार कर दिया।
तत्कालीन कुमाऊं आयुक्त रहे डी. सैंथिल पांडियन की जांच में नवंबर 2017 में एनएच-74 भूमि मुआवजा घोटाला उजागर हुआ था। इसके बाद 10 मार्च 2017 को ऊधमसिंह नगर के एडीएम (वित्त) प्रताप शाह ने तत्कालीन राजस्व और चकबंदी अधिकारियों के खिलाफ पंतनगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।
सरकार का कहना था कि एसआईटी की चार्जशीट में डीपी सिंह पर बिल्डर प्रिया शर्मा और सुधीर चावला के साथ मिलकर देवरिया किच्छा (ऊधमसिंह नगर) में खसरा-261, 272, 273 का इकरारनामा सतनाम सिंह के नाम करने का आरोप है।
इसलिए एसटीएफ की जांच के बाद तत्कालीन विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी डीपी सिंह को 21 नवंबर 17 को गिरफ्तार किया गया था। वह 28 नवंबर 2017 से जेल में थे। हाईकोर्ट ने 21 फरवरी को डीपी की जमानत याचिका स्वीकार की थी।
सोमवार को इस आदेश को जिला न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां 50-50 हजार रुपये के दो जमानती प्रस्तुत करते हुए उन्हें रिहा करने के आदेश दिए गए। जमानती प्रस्तुत करने के बाद शाम करीब पांच बजे उन्हें जिला कारागार से रिहा कर दिया गया। जेलर रमेश भारती ने इसकी पुष्टि की है। जेल प्रशासन के मुताबिक पत्नी, बच्चे समेत कई परिजन उन्हें लेने आए थे।