एक दिन पूर्व एक अन्य प्रकरण की सुनवाई के दौरान भारतीय वन्यजीव संस्थान ने बताया था कि पिछले छह महीनों के भीतर हरिद्वार व इसके आसपास के इलाकों में 222 जंगली जानवरों की सड़क हादसों में मौत हो चुकी है। एनजीटी में इस प्रकरण की पांच फरवरी को सुनवाई होगी।
क्या है पूरा मामला
राजाजी टाइगर रिजर्व के पश्चिमी और उत्तरी इलाकों मे रहने वाले वन्यजीवों मसलन हाथी, बाघ, गुलदार जैसे जानवर स्वच्छंद विचरण कर सकें, इसके लिए साल 2009 में सुप्रीम कोर्ट ने हरिद्वार से आगे राजाजी टाइगर रिजर्व के बीचों बीच मोतीचूर कॉरिडोर के निर्माण का आदेश जारी किया था। योजना बनाई कि प्रस्तावित कॉरिडोर के तहत हरिद्वार से लेकर लालतप्पड़ तक जगह-जगह फ्लाईओवर का निर्माण किया जाएगा। सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बाद साल 2011 में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने कॉरिडोर का निर्माण शुरू किया।
मोतीचूर कॉरिडोर में 731 मीटर के फ्लाईओवर का निर्माण किया जाना था, ताकि इस फ्लाईओवर के ऊपर से गाड़ियां निकल जाएं और राजाजी टाइगर रिजर्व के वन्यजीव फ्लाईओवर के नीचे से आसानी से इधर-उधर विचरण कर सकें। 2011 में कॉरिडोर का निर्माण भी शुरू कर दिया गया था, लेकिन पिछले आठ साल में इस कॉरिडोर का निर्माण पूरा नहीं किया जा सका। जिसका सीधा असर टाइगर रिजर्व के वन्यजीवों पर पड़ रहा है।