केदारनाथ के लिए उड़ान भरने वाली हेलीकॉप्टर सेवा से केदार घाटी के इको सिस्टम को हो रहे नुकसान पर चिंता जताते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने उत्तराखंड सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह ऐसी नीति बनाएं जिससे वनों को नुकसान न पहुंचे और यात्रियों को भी सुविधा मिले।
गुरुवार को इस मामले में महत्वपूर्ण फैसला देते हुए एनजीटी ने कहा कि केदारधाम आने वाले यात्रियों की सहुलियत के मद्देनजर हेलीकॉप्टर सेवा पर रोक लगाना उचित नहीं। लेकिन इससे वन, वन्य जीव और पर्यावरण पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े, यह सुनिश्चित करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। इसके लिए एनजीटी ने तीन माह में राज्य सरकार को वन, पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तो प्रस्ताव बनाकर भिजवाने के निर्देश दिए।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने गुरुवार को उत्तराखंड में केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य के पारिस्थितिकी संवेदनशील क्षेत्र के ऊपर हेलीकॉप्टर की उड़ान रोकने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि पर्यटन और यात्रियों की सुविधा को देखते हुए यह जरूरी है। लेकिन राज्य सरकार इसके लिए उड्डयन नीति के अनुरूप विशेष निर्देश जारी करे।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि हमने इस क्षेत्र में हेलीकॉप्टर उड़ना जारी रखते हुए राज्य सरकार से कहा है कि वह केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य के पारिस्थितिकी संवेदनशील क्षेत्र के लिए हेलीकॉप्टर द्वारा मचाए जाने वाले शोर के स्तर को देखते हुए उड्डयन नीति के अनुरूप विशेष निर्देश जारी करे।
एनजीटी ने राज्य सरकार को यह भी सुनिश्चित करने को कहाकि इससे केदार घाटी का इको सिस्टम प्रभावित न हो और हेलीकॉप्टर के शोर का लेवल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के निर्धारित मानकों से ज्यादा न हो। इसके अलावा उड़ान की ऊंचाई भी उड्डयन नीति के अनुरूप रहे और वन्यजीवों का अपने पुश्तैनी घर (केदारनाथ वन्यजीव विहार) में रहने का नैसर्गिक अधिकार सुरक्षित बना रहे।
बता दें कि 1 अगस्त 2015 को हेलीकॉप्टरों के शोर से घर छोड़ने को मजबूर हो रहे केदार घाटी के वन्य जीव शीर्षक से इस मुद्दे को उठाते हुए अमर उजाला ने सरकार और एनजीटी का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया था।
यही चाहता था अमर उजाला
अमर उजाला ने 1 अगस्त 2015 को सर्वप्रथम केदारनाथ वन्यजीव विहार के मूक वन्यजीवों की पीड़ा को उजागर करते समय ही साफ कर दिया था कि इस मुद्दे को उठाने के पीछे हमारा आशय यह नहीं है कि हेलीकॉप्टर की उड़ाने बंद कर दी जाएं।
हमारा इरादा है कि ऐसी व्यवस्था की जाए, जिससे न पर्यटन प्रभावित हो, न ही केदारघाटी का इको सिस्टम तबाह हो। गुरुवार को एनजीटी ने अपने फैसले में हमारे इसी इरादे को कायम रखा है।