एनजीटी ने केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए हरिद्वार से उन्नाव के बीच गंगा के कायाकल्प पर एक भी पैसा खर्च करने पर रोक लगा दी है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल ने कहा कि ऐसे अधिकारी इस राष्ट्रीय परियोजना पर 20,000 करोड़ रुपये खर्च कर चुके हैं, जो इस नदी के बारे में जानते तक नहीं।
स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली एनजीटी की पीठ ने कहा कि इस नदी को ठीक से जाने बिना अब तक इस राष्ट्रीय प्रोजेक्ट पर अब तक 20,000 करोड़ रुपये खर्च हो चुका है। पीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि कोई भी कुछ नहीं जानता, यह बेहद गैरजिम्मेदाराना है। एनजीटी ने कहा कि अब बहुत हुआ। अगले आदेश तक गंगा के कायाकल्प पर कोई भी विभाग एक पैसा खर्च नहीं करेगा।
मंत्रालयों पर एनजीटी के तेवर सख्त
एनजीटी ने कहा कि पर्यावरण एवं वन मंत्रालय और जल संसाधन मंत्रालय गंगा की सफाई के लिए जिम्मेदार हैं और वह अपना काम करने में एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप नहीं कर सकते। पीठ ने तल्खी दिखाते हुए कहा कि दोनों मंत्रालय एनजीटी को कुछ समझते ही नहीं। हमारे आदेशों पर एक फीसदी भी अमल नहीं हुआ।
पीठ ने कहा कि हमने ड्रेन का विश्लेषण करने को कहा था, लेकिन दोनों मंत्रालय में से किसी ने एक भी प्रशन का जवाब नहीं दिया। आप पूरे देश को नचा रहे हैं और आपके पास मूलभूत आंकड़े तक नहीं हैं।
सुनवाई के दौरान केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पीठ को सूचित किया कि उसके 19 अक्टूबर के निर्देश के मुताबिक एक समिति द्वारा गंगा में छोड़े जाने वाले कचरे की मात्रा और गुणवत्ता का निरीक्षण किया गया था।