राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने प्रदेश सरकार को गौरीकुंड और दूसरे गर्म झरनों के संरक्षण के निर्देश दिए हैं।
इस संबंध में प्राधिकरण में दाखिल याचिका में कहा गया था कि वर्ष 2013 की आपदा में क्षति ग्रस्त गौरीकुंड के संरक्षण के लिए कुछ नहीं किया गया है। गौरीकुंड मलबे में दबा हुआ है।
अधिवक्ता गौरव कुमार बंसल ने इस संबंध में याचिका दाखिल की थी। गौरीकुंड के मामले में वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के विज्ञानियों के शोध का भी हवाला दिया गया। गौरीकुंड के साथ ही एनजीटी ने प्रदेश सरकार को दूसरे गर्म झरनों के संरक्षण के भी निर्देश दिए हैं।