नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से राज्य के उन होटलों, आश्रमों और धर्मशालाओं की सूची तलब की है, जिनमें 20 से अधिक कमरे हैं। साथ ही सूची में यह भी जानकारी देनी होगी है क्या प्रबंधकों ने इनमें सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए हैं या नहीं ? यदि नहीं तो बोर्ड ने अब तक क्या कार्रवाई की ? इसके लिए बोर्ड को चार अक्तूबर तक का समय दिया गया है।
एनजीटी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को चार सितंबर को एक माह के भीतर सूची मुहैया कराने के लिए आदेश जारी किए थे, लेकिन बोर्ड अधिकारी अब तक एक भी होटल, आश्रम व धर्मशाला की जानकारी नहीं जुटा पाए। अब एनजीटी में तीन दिन बाद इसी प्रकरण की सुनवाई होनी है, लेकिन बोर्ड अधिकारियों को कोई जवाब बनता नहीं दिख रहा है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास प्रदेश के आश्रमों, होटलों और धर्मशालाओं का कोई ब्योरा न होने से अधिकारियों में अफरातफरी की स्थिति है। इसके लिए बोर्ड ने प्रशासन व विकास प्राधिकरणों से भी जानकारी मांगी, लेकिन उन्होंने भी जानकारी देने से हाथ खड़े कर दिए।
अब बोर्ड, सर्वे के लिए निजी कंपनी की मदद लेने जा रही है। इसके लिए टेंडर भी जारी कर दिया है, लेकिन कंपनी प्रबंधकों ने एक जिले में सर्वे के लिए आठ लाख रुपये की मांग की है। ऐसे में प्रदूषण बोर्ड को राज्य के सभी जिलों में सर्वे कराने के लिए एक करोड़ रुपये की जरूरत पड़ेगी।
एनजीटी ने राज्य के सभी जिलों के होटलों, आश्रमों व धर्मशालाओं का ब्योरा मांगा है। निजी कंपनी की मदद से ब्योरा जुटाया जाएगा। इसके सर्वे के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। एक माह के भीतर रिपोर्ट तैयार नहीं की जा सकती। सुनवाई के दौरान एनजीटी से समय बढ़ाने की मांग की जाएगी।
...एसपी सुबुद्धि, सदस्य सचिव, उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड