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NGT पहुंची केदारनाथ के वन्य जीवों की गुहार

Fri, 21 Aug 2015 12:39 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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हेलीकॉप्टरों के शोर से परेशान केदारनाथ वन्य जीव विहार के वन्य जीवों की गुहार नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल तक पहुंच गई है।
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गुरुवार को दोआबा पर्यावरण समिति के अध्यक्ष चंद्रवीर सिंह की ओर से दाखिल की गई याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार कर ली गई है। इस पर राज्य सरकार से केदारनाथ में उड़ान संचालित करने वाली हेलीकॉप्टर कंपनियों के साथ हुए पत्राचार का पूरा ब्योरा तलब किया गया है।

याचिका में कहा गया है कि  हेलीकॉप्टरों के शोर के कारण शेड्यूल-1 समेत अन्य वन्य जीव पलायन कर रहे हैं और उनकी प्रजनन क्षमता भी प्रभावित हो रही है। गौरतलब है कि हेलीकॉप्टर संरक्षित वन क्षेत्र के ऊपर से ये वन विभाग की एनओसी के बिना उड़ान भर रहे हैं। याचिका अधिवक्ता गौरव कुमार बंसल ने दाखिल की।
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उप वन संरक्षक, वन प्रभाग गोपेश्वर आकाश कुमार वर्मा की सरकार को वर्ष 2013 में प्रेषित रिपोर्ट और इस रिपोर्ट के हवाले से अमर उजाला में प्रकाशित समाचार श्रृंखला ‘हेलीकॉप्टरों के शोर से ‘घर’ छोड़ने को मजबूर हो रहे केदारघाटी के वन्य जीव’ को आधार बनाते हुए यह याचिका एनजीटी में गुरुवार को दाखिल की गई।

दोआबा पर्यावरण समिति ने केदारनाथ वन्य जीव विहार में बिना एनओसी संचालित हेलीकॉप्टरों की उड़ानों से वन्य जीवों के पलायन पर चिंता व्यक्त की है। कस्तूरी मृग, हिमालयन गिद्ध तथा अन्य पशु-पक्षियों के विहार छोड़ने से वनस्पतियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

बहुत सी वनस्पतियों का फैलाव पशु-पक्षियों की बीट के माध्यम से होता है। तितलियां विभिन्न वनस्पतियों के पराग कणों के फैलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

याचिका में कहा गया है कि हेलीकॉप्टरों के शोर से केदारनाथ वन्य विहार का इको सिस्टम प्रभावित हो रहा है। याचिका में केदारनाथ वन्य विहार को तत्काल इको-सेंसिटिव जोन घोषित किए जाने का अनुरोध किया गया है।

क्या है याचिका में
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में दाखिल की गई याचिका में उप वन संरक्षक, वन प्रभाग गोपेश्वर आकाश कुमार वर्मा की उस रिपोर्ट का भी जिक्र किया गया जिसमें वर्मा ने हेलीकॉप्टरों की उड़ानों से वन्य जीवों की तकलीफों का जिक्र किया था। साथ ही यह भी बताया था कि उनकी नोटिस का दो हेलीकॉप्टर कंपनियों को छोड़कर किसी ने जवाब नहीं दिया।

जिन दो हेलीकॉप्टर कंपनियों का जवाब आया, उन कंपनियों ने भी प्रमुख वन्य जीव प्रतिपालक उत्तराखंड से एनओसी नहीं ली थी। उप वनसंरक्षक ने अपनी रिपोर्ट में शेड्यूल-1 के कस्तूरी मृग और हिमालयन गिद्ध का जिक्र किया। यह भी कहा था कि शोर से तितलियां भी पलायन कर रही हैं।

तितलियां पोलीनेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उप वन संरक्षक की इसी रिपोर्ट के आधार पर अपर प्रमुख वन संरक्षक एस के दत्ता ने 11 जून 2013 को प्रमुख वन्य जीव प्रतिपालक को इन्हीं तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट भेजी थी।
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हेलीकॉप्टर कंपनियों के एनओसी न लेने पर दोनों रिपोर्ट में प्रमुख वन्य जीव प्रतिपालक से वन्य जीव-जंतु अधिनियम 1972 (यथा संशोधित 2006) की धारा 33, उपधारा बी,सी,डी, के तहत कार्रवाई का भी अनुरोध किया गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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