दून घाटी में उपखनिजों के उत्खनन मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के पूछे सवाल पर राज्य सरकार ने चुप्पी साध ली है। वन मंत्री दिनेश अग्रवाल का कहना है कि अभी ट्रिब्यूनल के आदेश की कापी का इंतजार किया जा रहा है। वहीं, इस मामले में अधिकारी भी कोई प्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं।
केंद्र और राज्य से मांगा जवाब
एनजीटी ने बृहस्पतिवार को दून निवासी अनिल कुमार महाजन की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और राज्य सरकार से दून घाटी में उपखनिज उत्खनन पर दी गई अनुमति की जानकारी स्पष्ट करने के लिए कहा था।
सरकार को सात मई तक जवाब देना है। लेकिन, शुक्रवार को वन मंत्री दिनेश अग्रवाल ने इस मसले पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
अधिकारी बता रहे भूल
उधर, एक अधिकारी ने बताया कि राज्य में छोटे स्तर पर खनन जारी होने से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन बड़े पैमाने पर खनन का आरोप सही नहीं है। उनका कहना था कि निजी खनन को भी कई बार सरकारी समझ लिया जाता है।
अधिकारी के मुताबिक कई बार लोग निजी जमीन खनन के लिए ठेकेदारों को सौंप देते है। भूमि नदी के किनारे होने और सही निशानदेही ना होने से ठेकेदार कई बार नदी से उपखनिज उठा ले जाते हैं।
नदी किनारे खनन होने से इसे अवैध खनन समझा जाता है। हालांकि, अधिकारी का कहना है कि ऐसे मामलों का पता चलते ही इस पर रोक लगा दी जाती है।