उत्तराखंड पुलिस सेवा के अफसर इस समय अजीब छटपटाहट में हैं। मसला, पीपीएस से आईपीएस कैडर में पदोन्नति पाने का है। पदोन्नति कोटे की कैडर में दो पोस्ट रिक्त हैं। तीन पोस्ट 2016 में रिक्त हो जाएंगी।
कुल मिलाकर पांच पीपीएस अफसरों को आईपीएस बनने का मौका मिलेगा, मगर उनकी इस खुशी में खलल पड़ रहा है, क्योंकि केंद्र के आदेश के बाद यूपी से तीन पीपीएस अफसरों के उत्तराखंड आने की खबर है। ऐसे में प्रदेश में तैनात अफसरों को आईपीएस बनने के लिए और इंतजार करना पड़ेगा।
राज्य के गृह विभाग द्वारा जारी वरिष्ठता सूची में जो नाम हैं, उनमें ददनपाल यूपी से नहीं आए हैं। एसटीएफ में तैनात मुकेश कुमार, विजिलेंस में धीरेंद्र गुंज्याल, एनआईए (नेशनल इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसी) में प्रतिनियुक्ति पर तैनात असीम श्रीवास्तव, एसपी सिटी हल्द्वानी यशवंत सिंह, एडिशनल एसपी पीएचक्यू गिरीश चंद्र ध्यानी, एसपी सिटी देहारदून अजय सिंह सबसे वरिष्ठ अफसरों में शुमार हैं।
ददनपाल को छोड़ दें तो 2015-16 में रिक्त पदोन्नति कोटे के पांच पदों पर मुकेश से लेकर अजय सिंह तक सभी आईपीएस बन जाएंगे। इसी बीच केंद्र के आदेश के बाद यूपी से तीन पीपीएस अफसर राजेंद्र कुमार, सुखबीर चौधरी और हरीश कुमार के आने की खबर है।
ये तीनों काफी वरिष्ठ हैं, इसलिए इनके आने के बाद राज्य में तैनात जो पांच अफसर आईपीएस बनने की लाइन में हैं, उनमें से तीन को मायूसी हाथ लगेगी।
ऐसे में इस समय राज्य में तैनात प्रांतीय पुलिस सेवा के अफसरों में यूपी से आने वाले अफसरों को लेकर गहमागहमी है। क्योंकि वे ठीक उस समय आ रहे हैं, जब राज्य के आधा दर्जन अफसर भारतीय पुलिस सेवा में शामिल होने की दहलीज पर हैं।
कैडर स्ट्रेंथ बढ़ने से मिलेगी राहत
राज्य की तरफ से आईपीएस कैडर की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार में विचाराधीन है। अभी कैडर में 69 पद हैं, लेकिन कैडर रिव्यू की मंजूरी के बाद 86 पद होंगे। 17 पद बढ़ने से पदोन्नति कोटे में पांच पद बढ़ जाएंगे।
यदि राज्य के प्रस्ताव को हूबहू मंजूरी मिली तो यूपी से आने वाले जिन अफसरों का हक मारा जा रहा हैं, वह सब भी आईपीएस बन सकेंगे। लेकिन इसका कहीं न कहीं नीचे तक असर रहेगा।
आईपीएस बनने के लिए आखिरी पायदान पर बैठा पीपीएस अफसर तो प्रभावित होगा ही। क्योंकि एक दो पीपीएस अफसर का रिटायरमेंट 2016 में भी है।