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आम आदमी की कमाई 'लूट' लेगी सड़कें

Tue, 04 Nov 2014 12:50 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड में नए सर्किल रेट ने आम आदमी को सड़कों के गणित में उलझाकर रख दिया है। लोग समझ नहीं कर पा रहे हैं कि वे किस तरह अपनी जमीन या मकान का रेट तय करें।
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बेस रेट के साथ सड़कों की चौड़ाई के हिसाब से लगने वाली स्टांप ड्यूटी जमीन या घर खरीदने का सपना देखने वालों की कमाई ‘लूट’ लेगी।

राजस्व विशेषज्ञों के मुताबिक सर्किल रेट की नई व्यवस्था विसंगतियों की वजह बन रही है। इसमें कई पेंच हैं, जिनमें आम आदमी के लिए उलझनें पैदा हो रही हैं।

उनका मानना है कि सर्किल रेट तय करने की पुरानी व्यवस्था ठीक थी। उसमें खसरा नंबर के लिहाज से भूमि का सर्किल रेट बढ़ाया जाता था। जिस खसरे की भूमि अधिक महंगी होती थी, उसी लिहाज से वहां का सर्किल रेट तय किया जाता था।

यह सीधा फॉर्मूला था, जिसमें लोग आसानी से स्टांप ड्यूटी तय कर लेते थे। अब बेस रेट के साथ सड़कों की चौड़ाई का मानक आम आदमी पर भारी पड़ेगा।

90 फीसदी तक बढ़ जाएगा रेट

रजिस्ट्री कराते ही आम आदमी पर स्टांप ड्यूटी की दोतरफा मार पड़ेगी। उसे सर्किल रेट के बेस रेट के हिसाब से स्टांप ड्यूटी देनी होगी, उस पर सड़क की चौड़ाई के हिसाब से भी बढ़ी हुई रकम चुकानी होगी।

मसलन, राजपुर रोड का बेस रेट करीब 22 प्रतिशत बढ़ा है, लेकिन सड़क के वर्गीकरण को ध्यान में रखें तो जमीन खरीदने वालों को स्टांप ड्यूटी में 90 प्रतिशत तक बढ़ोतरी झेलनी होगी।

एमडीडीए मानकों की अनदेखी
विशेषज्ञों का कहना है कि शासन ने सर्किल रेट का फॉर्मेट तैयार करते वक्त एमडीडीए की नियमावली को ध्यान में नहीं रखा। एमडीडीए के मानक में आवासीय क्षेत्रों में सड़क की चौड़ाई कम से कम नौ मीटर होनी चाहिए।

लेकिन नए सर्किल रेट में सिर्फ पांच मीटर सड़क को बेस रखा गया है। इससे आवासीय क्षेत्र के विकास में दिक्कत होगी। सर्किल रेट के हिसाब से क्षेत्र विकसित होने लगे तो भविष्य में आवाजाही की दिक्कत पैदा हो जाएगी।

एमडीडीए के सड़क चौड़ाई के मानक

आवासीय क्षेत्र- 9 मीटर
ग्रुप हाउसिंग- 12 मीटर
छोटे कामर्शियल कांप्लेक्स- 12 मीटर
मल्टीप्लेक्स- मेन रोड के साथ साइड रोड भी रहेगी

इंस्पेक्टरों की आएगी बहार
राजस्व विशेषज्ञों की मानें तो नए सर्किल रेट ने ‘इंस्पेक्टरों’ के लिए रिश्वत का रास्ता खोल दिया है। नई व्यवस्था के तहत राजस्व निरीक्षक रजिस्ट्री से पहले संबंधित जमीन या मकान के पास रोड की चौड़ाई चेक करने जाएंगे।

इससे रिश्वतखोरी बढ़ेगी। मनमाफिक रिपोर्ट लगाने के लिए लोग इंस्पेक्टरों को ‘खुश’ करने लगेंगे, जिससे धन उगाही होगी। इसके अलावा ‘बाबुओं’ की भी चांदी कटने लगेगी। इसका भार भी आम आदमी पर ही पड़ेगा।

ग्राहक की जेब दोहरी कट रही है। सर्किल रेट बहुत ज्यादा बढ़ा है। बेस रेट के साथ सड़क वर्गीकरण बढ़ा दिया गया है। महंगाई में इतने रेट बढ़ना उचित नहीं। इससे रिश्वतखोरी बढ़ेगी।
- वीके वर्मा, राजस्व अधिवक्ता
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फिर भी कंट्रोल नहीं होगा काला धन

जमीन की खरीद-फरोख्त में खुलकर इस्तेमाल किए जा रहे कालेधन को रोकने के लिए सर्किल रेट के जरिये पर्याप्त कोशिश नहीं की गई। जिन जगहों का सर्किल रेट घोषित हुआ वहां का बाजार भाव बहुत अधिक है। जिस दर से हकीकत में जमीन खरीदी जाती है, उसका खुलासा नहीं होता। इससे रजिस्ट्री में राजस्व हानि होती है।

शहर के विभिन्न हिस्सों में जमीन का बाजार भाव अलग-अलग है। सर्किल रेट से यह दर कई गुना अधिक है। इसके अलावा मोल-तोल पर भी जमीन का रेट निर्भर करता है। इस पर अंकुश लग सके इसके लिए शासन-प्रशासन के पास कोई पुख्ता तरीका नहीं है।

सर्किल रेट का शासन से फार्मेट आने के बाद कालेधन पर अंकुश लगाने की शासन की कवायद बेकार हो गई। इस संबंध में जिलाधिकारी चंद्रेश कुमार यादव का कहना है कि कालेधन को कंट्रोल करने के लिए ही स्टांप ड्यूटी में बढ़ोत्तरी की गई है। इसके लिए प्रवर्तन भी काम करता है। कालेधन पर अंकुश लगाने के लिए प्रयास जारी रहेंगे।

इन जमीनों के बाजार भाव
राजपुर रोड (मुख्य) 1 लाख 10 हजार
सहारनपुर रोड- 75 हजार
चकराता रोड- 75 से 80 हजार
हरिद्वार रोड- 84 हजार
ईसी रोड- 75 हजार
सहस्त्रधारा रोड- 40 हजार
डायवर्जन से मालसी पार्क- 70 हजार
नाप प्रति वर्ग मीटर में (प्रापर्टी डीलरों से प्राप्त रेट)

सर्किल रेट वेबसाइट पर देखें...
www.dehradun.nic.in
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