नए साल के स्वागत के लिए राजधानी देहरादून में जमकर धमाल होने वाला है। लोग नाचे गाएं और खुशियां मनाएं, इसके लिए कई स्थानों पर संगीतमय पार्टियों का आयोजन किया जा रहा है।
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जश्न की पार्टियां होटलों, रिजॉर्ट, बारात घरों आदि स्थानों पर आयोजित की जाएंगी। पार्टियों के आयोजन की अनुमति के लिए जिला प्रशासन के पास करीब 100 आवेदन आए हैं। सबसे अधिक जश्न की पार्टियों का आयोजन पहाड़ों की रानी मसूरी में होने वाला है।
वर्ष 2014 को विदा करने और साल 2015 का स्वागत करने के लिए रेसकोर्स के गुरुद्वारा मैदान में संगीतमय पार्टी का आयोजन किया जा रहा है। यहां रॉक बैंड पर नामी गायक धमाल मचाने वाले हैं। पीने पिलाने के साथ ही हंसी के फव्वारे भी फूटने वाले हैं। इसी तरह के तमाम आयोजन शहर के कई होटलों ओर रेस्त्रां में भी आयोजित किए जाएंगे।
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इसके लिए धड़ाधड़ बुकिंग चल रही है। संगठनों के अलावा क्लब और होटल प्रबंधन ने अपने सदस्यों और शहरियों के लिए रौनक भरी शाम का कार्यक्रम तैयार किया है। प्रेमनगर, पटेलनगर, जाखन आदि क्षेत्रों में भी पार्टियों का आयोजन होगा। एडीएम प्रशासन झरना कमठान ने बताया कि नए साल की पार्टियों के आयोजन के लिए आवेदन आ रहे हैं। अनुमति के बाद पार्टियों की सूची मनोरंजन कर विभाग को भेज दी जाएगी। इसके अलावा लोगों ने व्यक्तिगत स्तर पर भी पार्टी का कार्यक्रम तैयार किया है।
ऋषिकेश के जंगलों में रहेगी रौनक
नए साल पर इस बार गंगातटों के शिविरों के बजाय जंगल के शिविरों में अधिक रौनक रहेगी। दरअसल, पर्यटकों ने गंगा तटों के बजाए जंगल शिविरों की अधिक बुकिंग कराई है।
हर साल ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों में हजारों की संख्या में सैलानी नववर्ष को यादगार बनाने के लिए आते हैं। परिजनों के साथ लोग गंगा तटों पर शिविर और राफ्टिंग का लुत्फ उठाते हैं। लेकिन इस बार जंगल शिविरों का अधिक रुझान है।
कारोबारियों का कहना है कि शिवपुरी, मोहनचट्टी, घट्टूगाड़ में लगभग 50 जंगल शिविर लगते हैं। सभी शिविर महीने भर पहले ही बुक हो गए हैं। लेकिन अब भी दिल्ली, गुड़गांव और हरियाणा से बुकिंग के लिए फोन आ रहे हैं। उत्तरांचल फाइनेंस आउटडोर (यूएफओ) के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह रावत का कहना है कि पर्यटन विभाग द्वारा तट शिविरों पर लाइट और साउंड की अनुमति नहीं है। इस कारण पर्यटकों का रुझान कम है। जंगल शिविरों में लाइट और डीजे आदि की व्यवस्था है।
2000 तक आता है खर्च घट्टूगाड़ और मोहनचट्टी के जंगल शिविरों में प्रति पर्यटक 1800 से 2000 रुपये का खर्च आता है। इसमें कैंपिंग और डीजे की व्यवस्था उपलब्ध रहती है। कारोबारी नए साल के जश्न को रोमांचक बनाने की तैयारियों में जुटे हैं।
तट शिविर तट शिविरों में अधिकतर विदेशी पर्यटकों की आवाजाही रहती है, जिसमें व्यावसायियों की ओर से रिवर राफ्टिंग, बीच गेम्स, कैंप फायर, भोजन आदि की व्यवस्था की जाती है।
जंगल शिविर जंगल शिविरों में साल के आखिरी दिन जंगल के बीच रात गुजारने के लिए पर्यटक अलग तरह का लुत्फ महसूस करने आते हैं। जंगल शिविरों में पर्यटकों को कैंपिंग के साथ डांस, संगीत, भोजन आदि की व्यवस्था दी जाती है। जंगल में ज्यादा अंदर तक पर्यटकों का प्रवेश निषेध है। अधिकतर जंगल शिविर आबादी के करीबी क्षेत्र में हैं।
जंगल में जलेगी लाइट इस बार गंगा तट शिविरों में जश्न मनाने वाले लोगों को लालटेन की रोशनी में रात गुजारनी होगी। लेकिन जंगल शिविर रोशनी से जगमग रहेंगे। वन विभाग ने तट शिविरों में विद्युत व्यवस्था पर प्रतिबंध लगा दिया है। जबकि जंगल शिविरों को जेनरेटर और डीजे लगाने की अनुमति दी गई है।
नए साल पर पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए तीर्थनगरी के कुछ निजी होटल किफायती स्कीम की व्यवस्था की है, जबकि सरकारी विश्रामगृहों में ऐसा कुछ नहीं है। यहां बुकिंग पर न तो छूट है न ही पर्यटकों की अग्रिम बुकिंग मिल पाई है। गढ़वाल मंडल विकास निगम के भरतभूमि विश्रामगृह के प्रबंधक सुरेंद्र बहुखंडी ने बताया कि अभी तक उन्हें बुकिंग नहीं मिली है।
उधर, दून रोड स्थित होटल व्यवसायी अक्षत गोयल ने बताया कि होटल की ओर से इस बार युगल जोड़ों के लिए 15 सौ रुपये का स्पेशल पास रखा गया है। जिसमें महिला और पुरुष को संगीत, डीजे, भोजन आदि की सुविधाएं दी जाएंगी। स्कीम में बच्चों के लिए भी विशेष छूट दी गई है।
राफ्टिंग की ओर रुझान नहीं रिवर राफ्टिंग के लिए नए साल पर पर्यटकों की ओर से अभी तक एक भी ऑनलाइन बुकिंग नहीं मिल पाई है। राफ्ंिटग कंपनी के संचालक देवेंद्र रावत, दिनेश कठैत, गणेश थापा, योगेश बहुगुणा ने बताया कि ठंड के कारण पर्यटकों का रुझान रिवर राफ्टिंग की ओर कम दिखाई दे रहा है।
कैसे पहुंचे शिविरों तक तीर्थनगरी के आसपास के शिविरों तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को ज्यादा परेशानी नहीं होगी। हवाई सेवा से दून एयरपोर्ट (जौलीग्रांट) पहुंचा जा सकता है। यहां से बस या निजी वाहन से ऋषिकेश आ सकते हैं। ट्रेन अथवा बस से आने वाले पर्यटक सीधे ऋषिकेश पहुंचेंगे। कौड़ियाला, व्यासी, तपोवन आदि बीच कैंपों में जाने के लिए लोकल वाहन सेवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। घट्टूगाड और मोहनचट्टी के जंगल शिविरों में जाने के लिए बदरीनाथ राजमार्ग पर नीरगड्डू के समीप गरुड़चट्टी पुल से नीलकंठ मार्ग से होकर जाना होगा।