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उत्तराखंडः पुरानी नीति से यहां हो रहे नए तबादले

Fri, 08 May 2015 11:47 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड सरकार ने 2008 की तबादला नीति को इस साल के लिए भी लागू कर दिया है। वर्ष 2015 में अधिकारियों कर्मचारियों के स्थानांतरण इसी नीति के अनुरूप होंगे।
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तबादलों की अंतिम तिथि 15 जून 2015 होगी। इसके बाद कोई भी तबादला मुख्यमंत्री की मंजूरी के बगैर नहीं होगा। यह नीति आईएएस, आईपीएस व पीसीएस अफसरों पर लागू नहीं होगी। मुख्य सचिव के अनुमोदन के बाद कार्मिक विभाग ने गुरुवार को इस संबंध में शासनादेश जारी किया।

स्थानांतरण के लिए शासन, विभागाध्यक्ष, मंडल व जनपद स्तर पर विभागवार कमेटियों का गठन होगा। इनमें विभाग के अधिकारियों के अतिरिक्त दूसरे विभागों के अधिकारी भी शामिल होंगे। शासन स्तर पर अवस्थापना विकास आयुक्त, एफआरडीसी व समाज कल्याण आयुक्त शाखा को छोड़कर अन्य विभागों की स्थानांतरण कमेटी में कार्मिक विभाग का भी एक प्रतिनिधि होगा।
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सुगम क्षेत्रों में बीस प्रतिशत और दुर्गम में पंद्रह प्रतिशत तक ही तबादले किए जा सकेंगे। निर्धारित संख्या से ज्यादा तबादलों के लिए मुख्यमंत्री का अनुमोदन लेना होगा।

छह विकल्पों पर नजर
सामान्य स्थानांतरण के लिए छह विकल्पों का ध्यान रखा जाएगा। यह समयावधि पूरी होने, पदोन्नति होने, रिक्त स्थान की पूर्ति करने, प्रतिनियुक्ति से वापसी पर, स्वयं के खर्च पर पारस्परिक स्थानांतरण या दुर्गम में खाली पदों को भरने के लिए होंगे।

गृह जनपद में नहीं रहेंगे अधिकारी समूह क और ख श्रेणी के अधिकारियों के लिए एक जिले में समस्त पदों पर तैनाती की अवधि सुगम के लिए सामान्यत: तीन वर्ष और अधिकतम पांच वर्ष होगी।

दुर्गम में सामान्यत: दो व अधिकतम तीन वर्ष होगी। समूह क और ख के अधिकारियों को उनके गृह जनपद में नहीं रखा जाएगा। लेकिन गैर संवेदनशील पद या दुर्गम स्थान पर तैनाती के लिए छूट होगी।

चार्ज देकर ही अवमुक्त होंगे दुर्गम के कर्मचारी
नैनीताल मुख्यालय, तहसील हल्द्वानी, देहरादून (चकराता छोड़कर) हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में जिला प्रशासन के पदों पर किसी अधिकारी को दस वर्ष से ज्यादा समय तक नहीं रखा जाएगा और अगले पांच वर्ष तक उसी जिले में ऐसे कार्मिकों का स्थानांतरण नहीं होगा।

दुर्गम क्षेत्र में तैनात कर्मियों को तब तक अवमुक्त नहीं किया जाएगा जब तक उनका प्रतिस्थानी ना आ जाए। यदि कोई कर्मचारी किसी मान्यता प्राप्त कर्मचारी संघ का पदाधिकारी है तो उसे पद धारण करने की तिथि से अगले दो वर्ष तक स्थानांतरित नहीं किया जाएगा।
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