इस बार विधानसभा सत्र के दौरान जुलूस को रोकने के लिए पुलिस ने नई रणनीति से काम लिया। और इस रणनीति से भीड़ पर काबू भी पा लिया गया।
विधानसभा सत्र में जुलूस के दौरान होने वाले हंगामे, हुड़दंग को रोकने के लिए पुलिस अक्सर लाठियों और आंसू गैस का इस्तेमाल करती है। लेकिन भाजपा के प्रदर्शन के दौरान जिला पुलिस ने ऐसी रणनीति तैयार की कि शस्त्रहीन बल को बल प्रयोग की आवश्यकता ही नहीं पड़ी।
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वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक केवल खुराना की इस रणनीति को उच्चाधिकारियों ने भी सराहा। बृहस्पतिवार को रिस्पना के पास बैरियर पर पुलिस के रोकने के बाद सबसे आगे चल रहे कार्यकर्ता फुसफुसाए भी, ‘पुलिस खाली हाथ है, लाठीचार्ज तो होगा नहीं?’
इसके बाद कार्यकर्ताओं ने जोश दिखाकर पहला बैरियर ध्वस्त कर दिया, लेकिन दूसरे तक पहुंचने के लिए उन्हें खासी जद्दोजहद करनी पड़ी।
किसी तरह वे वहां पहुंचे, लेकिन तब हिम्मत जवाब दे गई जब ऐसे ही दो और बैरियर आगे नजर आए। दरअसल, पुलिस को पहले ही अंदेशा था कि भाजपा के प्रदर्शन में हजारों की संख्या में कार्यकर्ता आ सकते हैं। लेकिन बल प्रयोग की स्थिति में पुलिस पर सवाल उठने की आशंका के चलते पुलिस ने खास रणनीति बनाई।
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पुलिस ने सुबह ही रिस्पना पुल से पहले एक के बाद एक चार बैरियर बना दिए। शुरुआत के दोनों बैरियर पर सीओ और एएसपी रैंक के अधिकारी तैनात थे। बैरियरों के बीच खाली जगह में सैकड़ों जवान कतारबद्ध थे, लेकिन किसी के पास न तो लाठी थी, न टीयर गैस लांचर।
बाद के दो बैरियर पर खुद डीएम बीवीआरसी पुरुषोत्तम और एसएसपी केवल खुराना मयफोर्स मौजूद थे। इसके आगे वाटर कैनन रखी गई थी। हालांकि, इसके इस्तेमाल की नौबत ही नहीं आई।
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