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स्कूल वैन संचालकों में खिंची राजनीतिक ‘तलवार’

Wed, 07 Aug 2013 09:46 AM IST
देहरादून/अंकित चौधरी
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राजधानी में स्कूल वैन से बच्चे ढोने के लिए परमिट मिलने की व्यवस्था लागू होने के बाद स्कूल वैन संचालकों के बीच राजनीति की ‘तलवार’ खिंच गई है।
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पुराने संगठन (उत्तराखंड वैन एसोसिएशन) ने इनके परमिट की व्यवस्था के बाद बने नए संगठन पर सवाल खड़ा कर दिया है। उनका कहना है कि वैन संगठन की लड़ाई चार वर्ष हमने लड़ी और अब कांग्रेसी नेता इसे अपने भुना रहे हैं।

वैन संचालकों की लड़ाई शुरू
दरअसल, पिछले चार वर्ष पहले उत्तराखंड वैन एसोसिएशन बैनर से वैन संचालकों की लड़ाई शुरू हुई। संगठन ने अब वैन संचालकों को एक जुट करने के साथ ही उनके नियमों के तहत चलाने के लिए ऐसे परमिट की व्यवस्था कर दी, जिससे साधारण परमिट के मुकाबले कम टैक्स जमा कर बच्चे ढोए जा सकें।
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परमिट की व्यवस्था का उदय हुआ तो कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना के संरक्षण में एक नए स्कूल वैन संगठन का जन्म हो गया है। अब नए संगठन ने वैन संचालकों की लड़ाई का श्रेय अपने नाम ले लिया है।

हद तो यह हो गई है कि नए संगठन के नाम की पट्टी भी स्कूल वैनों पर चस्पा करवा दी गई। लेकिन जब ये परमिट लेने के परिवहन विभाग कार्यालय पहुंची तो इस पट्टी को नियमों के खिलाफ गलत ठहरा उतरवा दिया गया। इतना ही नहीं संगठन का कहना है कि वह उसका साथ देगा जो उसके साथ चलेंगे।

इनकी भी सुनिएः
हम चार वर्ष से वैन संचालकों के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। हमने वैन संचालकों के हक में जीत हासिल भी की। लेकिन अब एक और संगठन बनाकर कांग्रेस नेता इसका श्रेय लेने में जुटे हैं।
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- सचिन गुप्ता, प्रदेश अध्यक्ष, उत्तराखंड स्कूल वैन एसोसिएशन

सीएम से कार्रवाई के लिए दो माह की अनुमति और आरटीओ में प्रमुख लड़ाई लड़ मैने ही वैन संचालकों का मुद्दा फाइनल कराया है। जहां तक नई यूनियन की बात है तो इसमें कोई राजनीति नहीं की गई है। खुद वैन संचालक मेरे पास मुझे नई एसोसिएशन का संरक्षक बनाने आए थे।
- सूर्यकांत, संरक्षक, स्कूल वैन एसोसिएशन (नई बनी यूनियन)

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