केदारनाथ स्थित चोराबाड़ी ग्लेशियर के लिए निकले वाडिया हिमालयन भू विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों ने गौरीकुंड पार कर लिया है।
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मुश्किल रास्तों को पैदल पार कर रही टीम पहले जहां डेढ़ किमी की दूरी आधे घंटे में पूरी कर रही थी, अब उसे इसमें तीन घंटे लग रहे हैं।
रास्ते इस कदर कट गए हैं कि 50 से 100 मीटर पार करने के बाद चढ़ाई करनी पड़ रही है, फिर इतनी ही उतराई। बारिश की वजह से भू-स्खलन हुआ है। इसमें से कई भू-स्खलन नए हैं।
टीम का नेतृत्व कर रहे वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान के ग्लेशियोलाजिस्ट डा. डीपी डोभाल ने फोन पर बताया कि लैंड स्लाइड के चिन्हीकरण के साथ ही किस तरह से इन लैंड स्लाइड का ट्रीटमेंट हो सकता है, इसका एक डाटा तैयार किया जाएगा।
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वैज्ञानिकों का दौरा तकरीबन 10 दिन का है। वह चोराबाड़ी ग्लेशियर के पास स्थापित ऑब्जरवेटरी का निरीक्षण करने के साथ ही आपदा में बहे अन्य टावर को पुर्नस्थापित किए जाने के संबंध में फैसला लेंगे।
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