देश की नई शिक्षा नीति को लेकर उत्तराखंड के शिक्षाविद् बेहद उत्साहित हैं। उनका कहना है नई नीति में जो नए प्रावधान किए गए हैं, वह निश्चित रूप से आने वाले समय में एक बदलाव लेकर आएंगे। इससे बच्चों का सही विकास होगा। इसका असर देश में एक दशक में साफ नजर आएगा।
बोले शिक्षाविद्
पिछले सात दशकों में हमारे देश में शिक्षा का विस्तार तो हुआ लेकिन शिक्षा में मानवीय मूल्यों की कमी लगातार रही। हमारी गुरुकुल पद्धति एक बार फिर लौटकर आ रही है। नई शिक्षा नीति इस ओर इशारा कर रही है। निश्चिततौर पर इससे भारत फिर विश्व गुरु बनेगा। इसमें किए प्रावधान काबिले तारीफ हैं।
-प्रो. नरेंद्र एस चौधरी, कुलपति, तकनीकी विवि
नई शिक्षा नीति क्रांति लेकर आएगी। इसमें 10 प्लस 2 का सिस्टम खत्म करने, शोध को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय शोध संस्थान बनाने, कला, नृत्य सहित संस्कृति को पढ़ाई का हिस्सा बनाने के कदम सराहनीय हैं। इसका असर एक से दो दशक में नजर आएगा।
-डॉ. उदय सिंह रावत, कुलपति, एसजीआरआर विवि
अभी तक प्रोफेशनल कोर्स में एक साल की पढ़ाई के बाद डिप्लोमा, दो साल की पढ़ाई पर एडवांस डिप्लोमा और इससे आगे की पढ़ाई पर डिग्री मिलती थी। नई नीति में यह पैटर्न इंजीनियरिंग जैसे कोर्सेज के लिए भी लागू कर दिया है। नई नीति फायदेमंद साबित होगी।
-डॉ. एचएस धामी, पूर्व कुलपति सोबन सिंह जीना विवि, अल्मोड़ा
नई शिक्षा नीति देशभर के शिक्षा विशेषज्ञों की मदद से तैयार की है। इसमें एक सोच को बढ़ावा दिया गया है जो कि देश को विकास की ओर ले जाने के साथ ही विश्व गुरु भी बनाएगी। इस नीति का असर आने वाले एक दशक में साफ नजर आने लगेगा।
-डॉ. हेमचंद्र, कुलपति, एचएनबी मेडिकल विवि