सरकार के जाते-जाते उत्तराखंड पर कर्ज की एक और मोटी किश्त चढ़ने जा रही है। तमाम खर्चों के लिए खाली खजाने को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। यह किश्त साढ़े सात सौ करोड़ की होगी। इसे मिलाकर उत्तराखंड पर लगभग चार सौ तीस अरब रुपये का कुल कर्ज हो जाएगा।
फिजूलखर्ची और वित्तीय अनुशासन न होने के चलते उत्तराखंड सरकार का खजाना खाली है। बार-बार रिजर्व बैंक से कर्ज लेकर तमाम खर्चों को पूरा किया जा रहा है।
बीते छह माह में यह संभवत: पांचवां मौका है, जब विभिन्न योजनाओं के अलावा दूसरे खर्चों के लिए कर्ज लिया जा रहा है। इस बार यह राशि साढ़े सात सौ करोड़ रुपये है। इसे मिला लिया जाए तो राज्य लगभग चार सौ तीस अरब रुपये के कर्जे में डूब चुका है। ऐसे में लगभग पांच हजार करोड़ रुपये कुल कर्ज पर सालाना ब्याज जाएगा।