शनिवार को पुलिस अभिरक्षा में ‘रुद्र’ को बाल सदन देहरादून भेजा जाएगा। जिला प्रशासन ने अधीक्षका बाल सदन देहरादून को पत्र भेज दिया है। नवजात दो माह तक सदन में रहेगा। इस दौरान जिला बाल कल्याण समिति रुद्रप्रयाग भी समय-समय पर उसकी कुशलक्षेम के लिए वहां जाएगी।
दो माह तक नहीं दिया जा सकता गोद
जिला सभागार में हुई बैठक में जिलाधिकारी डॉ. राघव लंगर ने कहा कि कानूनी तौर पर किसी नवजात के मिलने के 60 दिन तक उसे गोद नहीं दिया जा सकता है। हो सकता है इस अवधि में उस नवजात पर वास्तविक वारिस अपना दावा करे।
60 दिन पूरे होने के बाद जिला बाल कल्याण समिति प्रस्ताव पारित कर नवजात को गोद देने की प्रक्रिया के तहत उसे पंजीकृत दत्तक ग्रहण समिति को सौंपेगी। नवजात को गोद लेने वाले दंपतियों का भी अपने राज्य या जिले में दत्तक ग्रहण समिति में पंजीकरण होना अनिवार्य है।
समिति की बैठक में दी जानकारी
शासकीय अधिवक्ता गजपाल सिंह रावत ने गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया के बारे में बताया। जिला बाल कल्याण समित की अध्यक्ष ऊषा सकलानी ने भी समिति का पक्ष रखा। बैठक में समिति के सचिव व जिला बाल कल्याण अधिकारी हर्षवर्धन भट्ट, सदस्य सुनीता जोशी, शासकीय केपी खन्ना, जिला सूचना अधिकारी बीसी नेगी सहित गोद लेने के लिए पहुंचे 13 दंपति मौजूद थे।