साइबर ठगों द्वारा लोगों की गाढ़ी कमाई लूटकर उसे ठिकाने लगाने के लिए पछवादून क्षेत्र के बैंक खातों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। देहरादून साइबर सेल की जांच रिपोर्ट के बाद सेलाकुई, विकासनगर और सहसपुर पुलिस ने कुल पांच संदिग्ध बैंक खातों को चिह्नित कर धोखाधड़ी की अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस इन म्यूल अकाउंट्स के जरिये हुए वित्तीय लेन-देन का नेटवर्क खंगालने में जुट गई है।
सेलाकुई थाना प्रभारी लोकपाल परमार ने बताया कि साइबर सेल से मिली संदिग्ध खातों की सूची के आधार पर जांच की गई। इसमें बैंक ऑफ इंडिया (बीओआई) और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की सेलाकुई शाखा के दो खाते संदिग्ध मिले। केवाईसी जांच में पहला खाता साबान अली (निवासी गोला, यूपी) और दूसरा खाता निखिल कुमार (निवासी पूर्विया लाइन, सेलाकुई) के नाम दर्ज पाया गया। जेएमआईएस पोर्टल पर पड़ताल में दोनों खातों के खिलाफ विभिन्न राज्यों में दो-दो ऑनलाइन साइबर शिकायतें दर्ज मिली हैं।
तकनीकी विश्लेषण से स्पष्ट हुआ कि आरोपियों ने जानबूझकर साइबर ठगी की रकम मंगाने के लिए अपने खाते अपराधियों को उपलब्ध कराए। इस मामले में कांस्टेबल मीना रावत और उम्मेद सिंह असवाल की तहरीर पर दोनों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई है।
वहीं, विकासनगर कोतवाली प्रभारी राजीव रौथाण ने बताया कि एसबीआई की मेन रोड शाखा के एक खाते में लेयर-1 के तहत ठगी के 50 हजार रुपये जमा कराए गए थे। उपनिरीक्षक चंद्रशेखर नौटियाल की तहरीर पर अज्ञात खाताधारक पर प्राथमिकी दर्ज की गई है।
इसके अलावा, सहसपुर कोतवाली प्रभारी प्रदीप रावत ने बताया कि मुख्य बाजार स्थित एचडीएफसी बैंक शाखा के दो खातों के खिलाफ कई राज्यों में साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज मिली हैं। उपनिरीक्षक अशोक कुमार की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस का मानना है कि इन सभी मामलों में खाताधारकों ने चंद रुपयों के लालच या कमीशन के चक्कर में अपने खातों का नियंत्रण शातिर अपराधियों को सौंप दिया था।
क्या होता है म्यूल अकाउंट
म्यूल अकाउंट वह बैंक खाता होता है, जिसका इस्तेमाल साइबर अपराधी अवैध रूप से ठगी या धोखाधड़ी के पैसे को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर करने या छिपाने के लिए करते हैं। इसमें खाते का असली मालिक या तो इस खेल से पूरी तरह अनजान होता है, या फिर वह थोड़े से लालच में आकर अपने खाते का पूरा कंट्रोल ठगों के हाथों में सौंप देता है। कानूनी तौर पर ऐसा करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।