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सेना में भर्ती होने आए 17 नेपाली युवा धरे

Thu, 15 Oct 2015 01:51 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
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भारतीय मूल के गोरखाओं की भर्ती रैली में फर्जी दस्तावेज बनाकर देहरादून में हो रही सेना में भर्ती होने आए 17 नेपाली मूल के युवाओं को सेना की काउंटर इंटेलिजेंस टीम ने पकड़ा है।
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टीम माओवादियों की सेना में घुसपैठ की सूचना पर काम कर रही थी, जिससे यह सुराग उसके हाथ लगा। पकड़े गए युवाओं ने लखनऊ में किसी दलाल को 50 हजार रुपए देकर सभी प्रमाण पत्र तैयार करवाए थे। सभी युवा भर्ती रैली का पहला चरण शारीरिक परीक्षा पास कर ली थी। माओवादी कनेक्शन को लेकर भी सेना इन युवाओं से पूछताछ कर रही है।

सेना की महिंद्रा ग्राउंड गढ़ी कैंट में चल रही भर्ती रैली में बुधवार का दिन उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के गोरखा युवाओं के लिए आरक्षित था। सुबह 5 बजे शुरू हुई रैली में दोपहर को मिलिट्री इंटेलिजेंस लखनऊ की देहरादून स्थिति काउंटर इंटेलिजेंस टीम रैली स्थल पर पहुंची। मेजर रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में टीम ने भर्ती होने आए युवाओं के दस्तावेज खंगालने शुरू किए।
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एक-एक कर टीम के हाथ 17 नेपाली युवा लगे, जिनके दस्तावेज फर्जी थे। यह युवा 1600 मीटर दौड़ की बाधा को पार करने वाले 583 गोरखा युवाओं में शामिल थे, जो मेडिकल तक पहुंच गए थे। पकड़े गए एक युवा को मंगलवार रात दून में फर्जी दस्तावेजों की डिलीवरी हुई। पकड़े युवाओं से सेना के अधिकारियों ने कई घंटे पूछताछ की।

50 हजार में बने थे दस्तावेज
नेपाल से एक दलाल की मदद से यह युवक लखनऊ पहुंचे, जहां इनके दसवीं, जाति प्रमाण, भारतीय गोरखा मूल का प्रमाण पत्र, स्थायी निवास प्रमाण पत्र आदि तैयार किए गए। कुछ का तो आधार कार्ड तक बना था। प्रमाण पत्रों के लिए 50 हजार रुपए तक एक युवक ने दलाल को दिए जबकि भर्ती होने के नाम पर भी उनसे वसूली हुई है।

माओवादी कनेक्शन खंगाल रही सेना
इंटेलिजेंस की सूचना माओवादियों को लेकर थी, जिसपर सेना का दल कार्य कर रहा था। टीम भर्ती स्थल पर किसी माओवादी के भर्ती होने के लिए पहुंचने की सूचना पर कार्य कर रही थी, लेकिन जो युवा पकड़े गए उनका देर शाम तक चली पूछताछ में माओवादी कनेक्शन सामने नहीं आया।

पहली बार पकड़े गए नेपाली युवा
सेना भर्ती रैली में इस तरह का फर्जीवाड़ा पहली बार पकड़ा गया है। अक्तूबर 2014 में भी आर्मी इंटेलिजेंस ने गोरखा भर्ती रैली में भारतीय मूल के गोरखा मूल होने के कई प्रमाण पत्रों को जांचा था। कई प्रमाण पत्रों पर सवाल भी खड़े हुए, लेकिन कोई अभ्यर्थी पकड़ा नहीं गया।

गिरोह तक पहुंचने की कोशिश
सेना भर्ती रैली में इस तरह के फर्जीवाड़े ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। नेपाल से लखनऊ तक किस तरह युवाओं पहुंच रहे हैं और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किन अन्य सेवाओं में भर्ती या रोजगार के लिए किया जा रहा है इसका कनेक्शन भी तलाशा जा रहा है।
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