कंचनपुर जिले के महेंद्रनगर से चंद किमी की दूरी पर मझगांव स्थित दुनिया के अनोखे शुक्लाफांटा नेशनल पार्क के वन्यजीव इन दिनों से सूखे से जूझ रहे हैं।
लंबे समय से बारिश न होने से बारहसिंघों के लिए दुनिया में प्रसिद्ध इस पार्क के ग्रास लैंड की हरियाली कम हो रही है। दावा है कि घास का यह मैदान एशिया में सबसे बड़ा है। गर्मी बढ़ने से घास सूख रही है और वन्यजीवों को भोजन के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। सही तरीके से देखभाल न होने से पार्क की रंगत फीकी पर रही है।
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी से सटे से 305 वर्ग किमी में फैले इस वन्यजीव आरक्षित क्षेत्र को नेपाल सरकार ने अब नेशनल पार्क का दर्जा दे दिया है। इस जंगल में विश्व में सर्वाधिक बारहसिंघा- हिरण होने का दावा किया जाता है, लेकिन इनमें से कुछ बारहसिंघों को दूसरे पार्क में शिफ्ट कर दिया गया है। इन दिनों यह पार्क मौसम के साथ-साथ नेपाल सरकार की बेरुखी का शिकार है।
पार्क घूमने आए नेपाल के एक अधिकारी का कहना था कि छह साल पहले ग्रास लैंड यानी शुक्लाफांटा में मचान से सैकड़ों बारहसिंघे झुंड में लहरों की तरह विचरण करते देखे जाते थे। अब उतने एक साथ नहीं मिलते। दूर तक निगाह डालने पर समूचे ग्रास लैंड में बारहसिंघों के दो-तीन झुंड ही दिखे। तराई क्षेत्र में लगातार हो रही तपिश से ग्रास लैंड की घास सूख रही है। इसके चलते वन्यजीव भोजन के लिए जंगल में इधर-उधर भटक रहे हैं। हालांकि ताल-तलैयों में अभी पानी उपलब्ध है।