मधेसी आंदोलन के बाद नेपाल में निर्धन वर्ग के लिए दो जून रोटी मयस्सर होना मुश्किल हो गई है। अमीर तपके का भी घरेलू बजट डगमगा गया है। घरेलू बजट में दो से ढाई गुना वृद्धि होने से सभी परेशान हैं।
मधेसी आंदोलन के बाद से नेपाल के आमजन का घरेलू बजट खासा डगमगा गया है। बैतड़ी निवासी भवानी दत्त जोशी के अनुसार उनका घरेलू बजट मधेसी आंदोलन के बाद ढाई गुना बढ़ गया है। नेपाल के पर्वतीय क्षेत्रों में नमक तक 25 से 30 रुपए प्रति किलो बिका। दालों की तरफ देखना तो नामुमकिन है।
खाद्यान्न के अलावा साबुन, वाशिंग पाउडर, चायपत्ती आदि मंहगे हुए हैं। नेपाल में सरसों, लाही का उत्पादन अधिक होने से तेल में वृद्धि नहीं हुई है, जिससे राहत मिली है। दैलेक निवासी धन सिंह थापा ने बताया कि बाहर से आने वाले उत्पाद महंगे होने से खासी दिक्कतें हो रही हैं।
मिर्च, मसाले, चीनी, सब्जियां, दवाइयां सब महंगे हो गए हैं। उन्होंने बताया कि सीमा पर रहने वाले लोग तो भारतीय बाजारों पर निर्भर हैं, लेकिन सुदूर पश्चिमांचल में वाहन नहीं पहुंचने से दैनिक उपभोग और आम जरूरत की वस्तुओं का अभाव बना हुआ है। इधर, नेपाल में डीजल सप्लाई होने से अब फिर से जीवन पटरी पर आने की संभावना बनी है।